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पाकिस्तान में एक दशक में डेंगू के मामले 3,000 फीसदी से अधिक बढ़े, 2022 में 32.8 लाख संक्रमण का अनुमान

नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में पिछले एक दशक के दौरान डेंगू संक्रमण के वास्तविक मामलों में 3,000 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, देश में डेंगू संक्रमण के मामले 2012 में करीब एक लाख से बढ़कर 2022 में अनुमानित 32.8 लाख तक पहुंच गए।
 

नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में पिछले एक दशक के दौरान डेंगू संक्रमण के वास्तविक मामलों में 3,000 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, देश में डेंगू संक्रमण के मामले 2012 में करीब एक लाख से बढ़कर 2022 में अनुमानित 32.8 लाख तक पहुंच गए।

आगा खान यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में किए गए इस शोध को प्रतिष्ठित जर्नल 'पीएलओएस वन' में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में बताया गया है कि पाकिस्तान में डेंगू संक्रमण का वास्तविक आंकड़ा नियमित रूप से दर्ज किए जाने वाले मामलों से कहीं अधिक है। शोधकर्ताओं के अनुसार, मौजूदा रोग निगरानी व्यवस्था संक्रमण के वास्तविक मामलों के एक छोटे हिस्से को ही दर्ज कर पा रही है।

नेपाल आजा की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने सांख्यिकीय मॉडलिंग और प्रयोगशाला से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर डेंगू के प्रसार का आकलन किया। इसमें पाया गया कि मच्छरों से फैलने वाली यह बीमारी पूरे पाकिस्तान में तेजी से फैल रही है। संक्रमण में सबसे अधिक वृद्धि 15 से 49 वर्ष की आयु के वयस्कों में दर्ज की गई।

अध्ययन के निष्कर्ष उस आम धारणा को भी चुनौती देते हैं, जिसके मुताबिक डेंगू मुख्य रूप से मानसून के बाद कुछ समय तक फैलने वाली मौसमी बीमारी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्तान में इसका संक्रमण अब सालभर बना रहने वाला खतरा बनता जा रहा है।

अध्ययन के अनुसार, पाकिस्तान का सिंध प्रांत डेंगू से सबसे अधिक प्रभावित रहा। वर्ष 2022 में यहां अनुमानित 26.3 लाख मामले सामने आए। प्रांत के जिलों में कराची ईस्ट में संक्रमण की दर सबसे अधिक दर्ज की गई। शोधकर्ताओं ने कहा कि घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में डेंगू का बढ़ता प्रसार सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।

अध्ययन में डेंगू के बढ़ते संक्रमण के पीछे कई कारणों की पहचान की गई है। इनमें तेजी से बढ़ता शहरीकरण, जल निकासी की खराब व्यवस्था, जगह-जगह जमा होने वाला पानी और भीषण बाढ़ का प्रभाव शामिल हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन परिस्थितियों में डेंगू फैलाने वाले मच्छरों को पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मिलता है, जिससे संक्रमण का दायरा तेजी से बढ़ता है। अध्ययन की प्रमुख लेखिका डॉ. जरमीन नसीम ने कहा कि पाकिस्तान में डेंगू का प्रसार अब सीमित अवधि के मौसमी प्रकोप तक नहीं रह गया है, बल्कि यह सालभर स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुका है।

शोध में कहा गया है कि पाकिस्तान की मौजूदा निगरानी व्यवस्था बीमारी के वास्तविक बोझ का सही आकलन नहीं कर पा रही है। इसके कारण संक्रमण की रोकथाम और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े उपायों की प्रभावशीलता भी प्रभावित हो सकती है। शोधकर्ताओं ने देश की रोग निगरानी प्रणाली में व्यापक बदलाव, नगर निकायों की स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था में सुधार तथा जांच सुविधाओं का विस्तार करने की सिफारिश की है। अध्ययन के मुताबिक, डेंगू के लगातार बढ़ते खतरे से निपटने और भविष्य में बड़े प्रकोपों के प्रभाव को कम करने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था, बेहतर जांच सुविधाएं और प्रभावी रोकथाम के उपाय जरूरी हैं।

--आईएएनएस

डीएससी