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क्वेटा में सैन्य कार्रवाई के बाद 300 माशवानी परिवारों का पलायन, खाने और रहने का संकट गहराया

क्वेटा, 7 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा जिले में जारी सेना की कार्रवाई के कारण यहां रहने वाले माशवानी जनजाति के परिवारों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सैन्य कार्रवाई के चलते लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। माशवानी जनजाति के करीब 300 परिवारों को अपने पुश्तैनी घर छोड़ने पड़े हैं।
 

क्वेटा, 7 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा जिले में जारी सेना की कार्रवाई के कारण यहां रहने वाले माशवानी जनजाति के पर‍िवारों का जीवन बुरी तरह प्रभाव‍ित हुआ है। सैन्‍य कार्रवाई के चलते लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। माशवानी जनजाति के करीब 300 परिवारों को अपने पुश्तैनी घर छोड़ने पड़े हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लगातार बारिश और ठंड के बीच विस्थापित लोगों को खाने, रहने और साफ पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ये परिवार क्वेटा के दक्षिण-पश्चिम में स्थित पंजपाई क्षेत्र के किली मोहम्मद खैल गांव से पलायन करने को मजबूर हुए।

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलाबारी और भारी हथियारों के इस्तेमाल से कई घरों को नुकसान पहुंचा है।

विस्थापित लोगों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। परिवारों का कहना है कि उनके पास बच्चों के साथ जाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है और उन्हें यह भी नहीं पता कि वे अपने घर कब लौट पाएंगे।

बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वे भोजन, आश्रय और साफ पीने के पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। बुधवार को किली मोहम्मद खैल इलाके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और हथियारबंद लोगों के बीच झड़प हुई थी। बताया गया कि इस दौरान फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) का एक जवान मारा गया।

'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने बताया कि एक अफगान शरणार्थी शिविर के पास भी गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। इसके बाद इलाके को घेर लिया गया और वहां रहने वाले लोगों को स्थान खाली करने के लिए कहा गया।

पख्तूनख्वा नेशनल अवामी पार्टी ने इस विस्थापन की निंदा करते हुए कहा कि सरकार की जिम्मेदारी लोगों को उनके घरों से बाहर निकालना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पार्टी ने अपने बयान में कहा, "सुरक्षा के नाम पर लोगों को उनके घरों और पुश्तैनी इलाकों से बेदखल करना खुला अन्याय और दमन है।"

पार्टी ने सरकार से मांग की कि विस्थापित परिवारों को भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं और उनकी सुरक्षित तथा सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित की जाए। पार्टी का कहना है कि आतंकवाद और उग्रवाद से निपटना राज्य की जिम्मेदारी है, लेकिन निर्दोष नागरिकों को सामूहिक सजा नहीं दी जानी चाहिए।

क्वेटा में हुआ यह विस्थापन ऐसे समय में सामने आया है जब ग्वादर जिले के शादी कौर इलाके के किसानों ने भी इसी तरह की शिकायतें उठाई हैं। उनका आरोप है कि सुरक्षा कारणों का हवाला देकर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वे अपने घरों और खेती की जमीन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने बताया कि कई परिवार पहले ही विस्थापित हो चुके हैं। वहीं जमीन मालिकों, किसानों और बटाईदारों को अपने बागों और तैयार फसलों तक पहुंचने से रोका जा रहा है। उनका कहना है कि इससे करोड़ों रुपए मूल्य की कृषि संपत्ति खतरे में पड़ गई है।

पिछले महीने मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने भी पाकिस्तानी अधिकारियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि पूरे बलूचिस्तान में हजारों परिवारों को जबरन विस्थापित किया गया है और उनसे उनके पुश्तैनी घर, आजीविका और अपनी जमीन पर रहने का अधिकार छीन लिया गया है।

बीवाईसी ने कहा, "पिछले कई महीनों से बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों से हजारों परिवारों को जबरन विस्थापित किया जा रहा है। जेहरी, सरावान, कलंद, जिवानी, नोशकी, चागई, खरान, मंड, दाश्त, सानी शोरान, मंगचर, मस्तुंग, मश्के और कई अन्य क्षेत्रों में लोगों को अपने पैतृक घर छोड़ने पड़े हैं। कई और इलाकों को खाली करने के नोटिस भी दिए जा चुके हैं। यह सूची लगातार लंबी होती जा रही है और किसी को नहीं पता कि अगला नंबर किस बस्ती का होगा।"

--आईएएनएस

एवाई/वीसी