अमेरिका का ‘अविश्वसनीय’ सहयोगी और ‘बेहद समस्याग्रस्त’ साझेदार है पाकिस्तान: रिपोर्ट
वॉशिंगटन, 8 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के साथ मेजर नॉन-नाटो एलाय (एमएनएनए) का दर्जा हासिल होने के बावजूद पाकिस्तान लगातार एक अविश्वसनीय रणनीतिक साझेदार साबित हुआ है। एक रिपोर्ट में गुरुवार को कहा गया कि पाकिस्तान को भरोसेमंद सहयोगी नहीं, बल्कि एक बेहद समस्याग्रस्त साझेदार के रूप में देखा जाना चाहिए और उसे मिले एमएनएनए विशेषाधिकारों पर गंभीर पुनर्विचार किया जाना जरूरी है।
न्यूयॉर्क स्थित थिंक टैंक गैटस्टोन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के नेतृत्व की ईरान को अमेरिका और यहां तक कि इज़रायल से अधिक प्राथमिकता देने की नीति इस बात को रेखांकित करती है कि वॉशिंगटन इस्लामाबाद पर, खासकर गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर, भरोसा क्यों नहीं कर सकता।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने आज तक इज़रायल को मान्यता नहीं दी है। इसके अलावा, 1979 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी द्वारा ईरान में इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना के बाद पाकिस्तान उसे मान्यता देने वाला पहला देश था। उल्लेखनीय है कि 1947 में पाकिस्तान के गठन के समय ईरान उसे मान्यता देने वाला पहला देश था। दोनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर का है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर ईरान के साथ अपने संबंधों को भाईचारे और साझा क्षेत्रीय हितों पर आधारित बताता है और दोनों देशों की नीतिगत प्राथमिकताओं में व्यापक समानता देखी जाती है।
इस समानता का एक प्रमुख उदाहरण बलूचिस्तान को लेकर दोनों देशों का रुख है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान और पाकिस्तान, दोनों ही बलूच राजनीतिक गतिविधियों को अपनी क्षेत्रीय अखंडता और राज्य सत्ता के लिए सीधा खतरा मानते हैं। नवंबर 2024 में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के तत्कालीन कमांडर मेजर जनरल हुसैन सलामी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों देशों ने बलूच स्वतंत्रता आंदोलनों के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह गठजोड़ चीन के साथ साझा आर्थिक हितों से और मजबूत होता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है, जबकि ईरान भी इन दोनों में शामिल होने की इच्छा रखता है।
--आईएएनएस
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