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पाकिस्तान में टेक्सटाइल मजदूरों का शोषण, कम वेतन और खतरनाक माहौल में काम करने को मजबूर

इस्लामाबाद, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग उद्योग में मजदूरों के साथ श्रम अधिकारों के गंभीर उल्लंघन का खुलासा हुआ है। श्रम शिक्षा प्रतिष्ठान (एलईएफ) और नीदरलैंड स्थित अरिसा के संयुक्त अध्ययन में यह सामने आया है, जिससे “सस्टेनेबल फैशन” की वास्तविक लागत पर सवाल खड़े हो गए हैं।
 
पाकिस्तान में टेक्सटाइल मजदूरों का शोषण, कम वेतन और खतरनाक माहौल में काम करने को मजबूर

इस्लामाबाद, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग उद्योग में मजदूरों के साथ श्रम अधिकारों के गंभीर उल्लंघन का खुलासा हुआ है। श्रम शिक्षा प्रतिष्ठान (एलईएफ) और नीदरलैंड स्थित अरिसा के संयुक्त अध्ययन में यह सामने आया है, जिससे “सस्टेनेबल फैशन” की वास्तविक लागत पर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, फैशन ब्रांड्स जहां टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग को टिकाऊ फैशन का आधार बताकर प्रचार करते हैं, वहीं वे इस प्रक्रिया से जुड़े श्रमिकों के अधिकारों के उल्लंघन के प्रति न तो जागरूक हैं और न ही जवाबदेह। अध्ययन में करीब 20 प्रमुख ब्रांड्स का विश्लेषण किया गया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि रीसाइक्लिंग से बने कपड़े बेचने वाली अधिकांश कंपनियों के पास अपने सप्लाई चेन में काम करने वाले मजदूरों की कार्य परिस्थितियों और वेतन से जुड़ी कोई ठोस जानकारी नहीं है। पाकिस्तान के फैसलाबाद और कराची जैसे प्रमुख टेक्सटाइल हब में किए गए अध्ययन ने इस अनौपचारिक उद्योग की कठोर सच्चाई उजागर की है।

मजदूरों ने बताया कि उन्हें रोजाना 12 घंटे तक, सप्ताह के सातों दिन काम करना पड़ता है। अधिकतर के पास न तो कोई औपचारिक अनुबंध है, न सैलरी स्लिप और न ही नौकरी की सुरक्षा। रिपोर्ट के मुताबिक, मजदूरी अक्सर नकद दी जाती है, जो बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त नहीं होती।

इसके अलावा, मजदूरों को बिना उचित सुरक्षा उपकरण और वेंटिलेशन के गर्मी, धूल और खतरनाक रसायनों के संपर्क में काम करना पड़ता है, जिससे सांस, त्वचा और आंखों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बना रहता है। बिना प्रशिक्षण के मशीनों का इस्तेमाल करने से गंभीर हादसों की आशंका भी बढ़ जाती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश मजदूर प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले समुदायों से आते हैं। सीमित रोजगार विकल्पों के कारण वे मजबूरी में इन परिस्थितियों में काम करते हैं। अध्ययन में बाल श्रम के मामलों का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट के बावजूद, कई ब्रांड्स या तो अपने रीसाइक्लिंग सप्लाई चेन की जानकारी नहीं रखते या अस्पष्ट खुलासों के जरिए जिम्मेदारी से बचते हैं, जबकि वे रीसाइकल्ड कपड़ों को टिकाऊ और नैतिक विकल्प के रूप में बढ़ावा देते रहते हैं।

एलईएफ और एरिसा ने फैशन ब्रांड्स से अपील की है कि वे अपनी सप्लाई चेन, विशेष रूप से रीसाइक्लिंग इकाइयों की पहचान करें और श्रम व मानवाधिकारों से जुड़े जोखिमों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएं।

--आईएएनएस

डीएससी