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पाकिस्तान: महरंग बलोच को आजीवन कारावास की सजा, मानवाधिकार संगठन बोले- 'ये न्यायिक आतंकवाद'

क्वेटा, 23 जून (आईएएनएस)। जानी-मानी बलूच कार्यकर्ता महरंग बलोच को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। पाकिस्तानी अदालत के इस फैसले को मानवाधिकार संगठनों ने 'अन्याय' और 'न्यायिक आतंकवाद' का नाम दिया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक महरंग समेत चार बलोच कार्यकर्ताओं को उम्र कैद की सजा दी गई है।
 
पाकिस्तान: महरंग बलोच को आजीवन कारावास की सजा, मानवाधिकार संगठन बोले- 'ये न्यायिक आतंकवाद'

क्वेटा, 23 जून (आईएएनएस)। जानी-मानी बलूच कार्यकर्ता महरंग बलोच को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। पाकिस्तानी अदालत के इस फैसले को मानवाधिकार संगठनों ने 'अन्याय' और 'न्यायिक आतंकवाद' का नाम दिया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक महरंग समेत चार बलोच कार्यकर्ताओं को उम्र कैद की सजा दी गई है।

पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने सोमवार को महरंग बलोच सहित चार कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

फैसले की निंदा करते हुए बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने पाकिस्तान को “आतंकवादी देश” बताया और आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में भय और दहशत फैलाने के लिए इस्लामाबाद अपनी सत्ता और संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रहा है।

बीएनएम ने एक्स पर लिखा, “हम इस फैसले को अस्वीकार करते हैं। पाकिस्तान का यह न्यायिक आतंकवाद बलोच राष्ट्रीय आंदोलन को नहीं रोक सकता और न ही प्रतिरोध की राजनीति का मार्ग अवरुद्ध कर सकता है।”

वहीं, ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) ने इस फैसले को “न्याय का हनन” बताया और कहा कि इसका उद्देश्य शांतिपूर्ण मानवाधिकार गतिविधियों को अपराध घोषित करना तथा सत्ता-प्रायोजित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराना है।

एचआरसीबी ने कहा, “ऐसे कदम असहमति के दमन और बलूचिस्तान में मौलिक स्वतंत्रताओं के लगातार सिकुड़ते दायरे को दर्शाते हैं। नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय वाचा (आईसीसीपीआर) के तहत पाकिस्तान पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संगठन बनाने की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की रक्षा का दायित्व है, जिन्हें इस फैसले से गंभीर क्षति पहुंची है।”

इसके अलावा, ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) ने भी महरंग बलोच और अन्य कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराए जाने की आलोचना करते हुए फैसले की शीघ्र समीक्षा की मांग की।

एचआरसीपी ने एक्स पर लिखा, “दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, राज्य ने मौलिक अधिकारों की वकालत को भी उसी नजरिए से देखना जारी रखा है, जिससे वह उग्रवाद का सामना करता है। इसके परिणामस्वरूप कार्यपालिका और न्यायपालिका के ऐसे फैसले सामने आए हैं जो असंतुलित और पूर्वाग्रहपूर्ण प्रतीत होते हैं। हम आतंकवाद-रोधी अदालत के फैसले की जल्द समीक्षा और बलूचिस्तान में राजनीतिक संवाद शुरू करने की मांग करते हैं।”

शाली बलोच, जो बलोच वूमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) की केंद्रीय संयोजक हैं, ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी समुदाय तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से इस कथित “न्यायिक और सरकारी दमन” के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “आज बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ आए अदालती फैसलों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की न्यायिक व्यवस्था पारदर्शिता और अहिंसा में विश्वास रखने वाले बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है। बलूचिस्तान में शांतिपूर्ण और संवैधानिक संघर्ष की आवाजों को दबाने के लिए राज्य संस्थान हर संभव तरीका अपना रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हम इस फैसले को राजनीतिक कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने और असहमति को अपराध घोषित करने की कड़ी का एक और हिस्सा मानते हैं और इसकी कड़ी निंदा करते हैं।”

वहीं, शफी बुरफत, जो जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) के अध्यक्ष हैं, ने इस फैसले को पाकिस्तान के कथित रूप से “पीड़ित क्षेत्रों” के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ “मनोवैज्ञानिक हथकंडा” और “सत्ता-प्रेरित नियंत्रण का उपकरण” बताया।

बुरफत ने एक्स पर लिखा, “हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र, वैश्विक मानवाधिकार संगठनों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और दुनिया भर की स्वतंत्रता-समर्थक शक्तियों से अपील करते हैं कि वे पाकिस्तान में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ जारी कार्रवाइयों, जबरन गुमशुदगियों, राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित सजाओं और असहमति को अपराध घोषित करने वाली नीतियों का संज्ञान लें। हम उनसे मानवाधिकारों, राजनीतिक स्वतंत्रताओं और न्याय की रक्षा में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह करते हैं।”

--आईएएनएस

केआर/