पाकिस्तान में पांच वर्षों में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ 237,216 अपराध दर्ज किए गए
इस्लामाबाद, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद स्थित एक मानवाधिकार समूह का हवाला देते हुए बताया गया है कि 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ 237,216 अपराध दर्ज किए गए हैं।
पीस एंड जस्टिस नेटवर्क (पीजेएन) पाकिस्तान ने अपनी राष्ट्रीय न्याय विकास डेटा (डी4जेडी) पहल के तहत अपनी राष्ट्रीय लिंग आधारित हिंसा (जीबीवी) अपराध रिपोर्ट 2021-2025 में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा की भयावह तस्वीर पेश की है।
पाकिस्तान ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान भर में लिंग आधारित हिंसा के वास्तविक पैमाने को समझने के लिए प्रांतीय आंकड़ों से मिलने वाली जानकारी और उनसे छिपी हुई जानकारी दोनों का विश्लेषण करना आवश्यक है।
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए लिंग आधारित हिंसा (जीबीवी) के सभी मामलों में से 82.5 प्रतिशत (195,787 मामले) दर्ज किए गए, जबकि देश की जनसंख्या का केवल 51.5 प्रतिशत पंजाब में ही है।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि सामूहिक दुष्कर्म, हिरासत में यौन हिंसा और सगे संबंधियों के बीच यौन संबंध के मामलों में से 90 प्रतिशत से अधिक मामले पंजाब में दर्ज किए गए।
वहीं, दूसरी ओर, सिंध में पांच साल की अवधि के दौरान 25,107 जीबीवी मामले दर्ज किए गए, जो राष्ट्रीय कुल का 10.6 प्रतिशत है। अपहरण और अगवा करना प्रांत में दर्ज किए गए लिंग आधारित अपराधों में सबसे अधिक थे, जिनकी संख्या 19,289 थी। यह कुल मामलों का लगभग 77 प्रतिशत है।
पाकिस्तान की 16.5 प्रतिशत आबादी वाले खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में 10,210 मामले दर्ज किए गए, जो राष्ट्रीय कुल का मात्र 4.3 प्रतिशत है। हालांकि, अपेक्षाकृत कम दर्ज किए गए मामलों की संख्या एक भयावह वास्तविकता को छिपाती है: पुलिस को दर्ज किए गए घरेलू हिंसा के 2,334 मामलों में से 1,197 मामलों में हत्या हुई, यह जानकारी शोध में सामने आई।
इसके अतिरिक्त, बलूचिस्तान में 3,108 मामले, उसके बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में 1,572 मामले और पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) में 161 मामले दर्ज किए गए। ये आंकड़े हिंसा की रिपोर्टिंग में संस्थागत और भौगोलिक बाधाओं को दर्शाते हैं।
पीओजीबी में पांच वर्षों में दर्ज किए गए दुष्कर्म के मात्र सात मामले हिंसा की अनुपस्थिति के बजाय घनिष्ठ सांप्रदायिक संरचनाओं और भौगोलिक अलगाव के कारण गंभीर रूप से कम रिपोर्टिंग को दर्शाते हैं। पीओके में, आंकड़े अपहरण और अगवा करने के मामलों की ओर बहुत अधिक झुके हुए हैं; 1,572 मामलों में से 1,474 मामले इन श्रेणियों में आते हैं, जबकि घरेलू शारीरिक हिंसा पुलिस रिकॉर्ड में काफी हद तक अदृश्य बनी हुई है।
--आईएएनएस
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