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2031 तक ‘प्रबंधित गिरावट’ का खतरा, पाकिस्तान को तुरंत व्यापक सुधारों की जरूरत: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान को टैक्स का दायरा बढ़ाने, ऊर्जा क्षेत्र की अक्षमताओं को दूर करने और शासन में ‘एलीट कैप्चर’ जैसी गहरी संरचनात्मक कमजोरियों से निपटने के लिए तत्काल व्यापक सुधार करने होंगे, अन्यथा 2031 तक देश ‘प्रबंधित गिरावट’ (मैनेज्ड डिक्लाइन) की ओर बढ़ सकता है। यह चेतावनी एक नई रिपोर्ट में दी गई है।
 
2031 तक ‘प्रबंधित गिरावट’ का खतरा, पाकिस्तान को तुरंत व्यापक सुधारों की जरूरत: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान को टैक्स का दायरा बढ़ाने, ऊर्जा क्षेत्र की अक्षमताओं को दूर करने और शासन में ‘एलीट कैप्चर’ जैसी गहरी संरचनात्मक कमजोरियों से निपटने के लिए तत्काल व्यापक सुधार करने होंगे, अन्यथा 2031 तक देश ‘प्रबंधित गिरावट’ (मैनेज्ड डिक्लाइन) की ओर बढ़ सकता है। यह चेतावनी एक नई रिपोर्ट में दी गई है।

पाकिस्तान के अखबार बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के मुताबिक, आधे-अधूरे सुधारों की स्थिति में अगले पांच वर्षों में औसत वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर 2 से 3 प्रतिशत के आसपास ही रह सकती है, जो जनसंख्या वृद्धि दर से थोड़ी ही अधिक होगी। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति ठहराव (स्टैगनेशन) को दर्शाती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “एक युवा आबादी वाले देश में ठहराव विस्फोटक साबित हो सकता है।” इसमें चेतावनी दी गई है कि अगले पांच साल तय करेंगे कि देश की युवा आबादी ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ बनेगी या अस्थिरता का कारण।

रिपोर्ट के अनुसार, यदि रोजगार के अवसर कमजोर बने रहे तो विदेश पलायन तेज होगा। प्रवासी भारतीयों की तरह विदेश से आने वाली रेमिटेंस कुछ समय के लिए अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकती है, लेकिन ‘ब्रेन ड्रेन’ धीरे-धीरे देश की आंतरिक क्षमता को कमजोर कर देगा।

विश्लेषकों का कहना है कि स्थिरीकरण कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का समर्थन केवल अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन इससे दीर्घकालिक और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि संभव नहीं है। यदि सरकार ने निर्णायक कदम नहीं उठाए, तो रोजगार मुख्य रूप से अनौपचारिक और कम उत्पादकता वाले सेवा क्षेत्रों तक सीमित रहेगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कर सुधार, राजस्व संग्रह का डिजिटलीकरण और निर्यातोन्मुखी नीतियों के जरिए 2029-30 तक विकास दर 4 से 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे गरीबी में मामूली कमी संभव है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दशकों से राज्य की मुख्य विफलता कर आधार का विस्तार न कर पाना और शासन में प्रभावशाली वर्गों की पकड़ को कम न कर पाना रही है। इसमें चेतावनी दी गई है कि तेल की कीमतों में उछाल, जलवायु आपदाएं और भू-राजनीतिक तनाव जैसे हर बाहरी झटके से देश फिर आपात वित्तपोषण की स्थिति में पहुंच सकता है।

एक अन्य हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान शिक्षा पर जीडीपी का केवल 1.9 प्रतिशत खर्च करता है, जो अंतरराष्ट्रीय मानक 4 से 6 प्रतिशत से काफी कम है। देश में करीब 2.62 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं। पाठ्यक्रम में डिजिटल कौशल, आलोचनात्मक सोच और व्यावहारिक शिक्षा का अभाव है, जिससे कार्यबल तकनीकी बदलावों के लिए तैयार नहीं हो पा रहा।

सर्वेक्षणों के अनुसार, 64 प्रतिशत स्नातकों को कौशल की कमी के कारण रोजगार पाने में कठिनाई होती है, जबकि युवाओं में स्नातक बेरोजगारी दर लगभग 31 प्रतिशत आंकी गई है।

रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया है कि 2026 से 2031 के बीच पाकिस्तान का भविष्य उसके कर्ज के स्तर, महंगाई की स्थिति और गरीबी रेखा से तय होगा। यदि ठोस और व्यापक सुधार नहीं किए गए, तो धीमी वृद्धि और ऊंची महंगाई घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाती रहेगी।

--आईएएनएस

डीएससी