पाकिस्तान सिख श्रद्धालुओं को गुमराह कर खालिस्तान अभियान को दे रहा बढ़ावा: रिपोर्ट
इस्लामाबाद, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। अपनी नापाक हरकतों से बाज न आते हुए पाकिस्तान लगातार सिख समुदाय के कुछ वर्गों को भड़काने की कोशिश कर रहा है। साथ ही सीमा से लगे इलाकों के भोले-भाले ग्रामीणों को गुमराह कर खालिस्तान अभियान की ओर आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
'खालसा वॉक्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान से भारत में हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी जारी है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इसमें सिर्फ एजेंसियां ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान में रह रहे सिख समुदाय के कुछ अलगाववादी तत्व भी शामिल हो सकते हैं।
हाल ही में पाकिस्तान गए श्रद्धालुओं के समूहों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी सिख नेता गोपाल सिंह चावला श्रद्धालुओं से बातचीत के दौरान खालिस्तान के समर्थन में प्रचार करते दिखाई दिए।
रिपोर्ट में कहा गया कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और एक सुनियोजित उकसावे की रणनीति को दर्शाता है। किसी पवित्र धार्मिक यात्रा को राजनीतिक मंच में बदलना न तो उचित है और न ही स्वीकार्य।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की धरती से इस तरह के बयान पहली बार नहीं आए हैं। बार-बार ऐसे तत्वों को बढ़ावा देना और अलगाववादी भावनाओं को हवा देना इस बात का संकेत है कि कुछ ताकतें धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर भारत, खासकर पंजाब का माहौल प्रभावित करना चाहती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि यह न सिर्फ भारत की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश है, बल्कि सिख समुदाय की आस्था को भी ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
इसके अलावा, श्रद्धालु जो शांति और श्रद्धा की भावना से पवित्र स्थलों के दर्शन करने जाते हैं, उन्हें इस तरह के राजनीतिक और भड़काऊ बयानों के संपर्क में लाया जाना गंभीर साजिश की ओर इशारा करता है। ऐसे प्रयास युवाओं को गुमराह कर गलत रास्ते पर धकेलने का माध्यम भी बन सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि पंजाब ने आतंकवाद और अलगाववाद के कठिन दौर से बड़ी मेहनत के बाद बाहर निकलकर विकास, शांति और सामाजिक सौहार्द की राह पकड़ी है। ऐसे में इस तरह के भड़काऊ बयान पुराने जख्मों को फिर से कुरेद सकते हैं और क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल सकते हैं।
रिपोर्ट ने मांग की कि ऐसे तत्वों और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त कूटनीतिक और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि धार्मिक यात्राएं किसी भी राजनीतिक एजेंडे से मुक्त रहें।
रिपोर्ट में कहा गया कि समय की मांग सतर्कता, एकता और दृढ़ता है। पाकिस्तान की धरती से चलाए जा रहे एजेंडों का मुकाबला मजबूत इच्छाशक्ति और स्पष्ट नीति से ही किया जा सकता है, ताकि देश की एकता और अखंडता हर हाल में सुरक्षित रहे।
--आईएएनएस
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