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पहलगाम आतंकी हमला जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए एक बड़ा झटका: डॉ. फारूक अब्दुल्ला

श्रीनगर, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को 22 अप्रैल 2025 के भयानक पहलगाम हमले को जम्मू-कश्मीर के लिए एक बड़ा झटका बताया।
 
पहलगाम आतंकी हमला जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए एक बड़ा झटका: डॉ. फारूक अब्दुल्ला

श्रीनगर, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को 22 अप्रैल 2025 के भयानक पहलगाम हमले को जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए एक बड़ा झटका बताया।

डॉ. अब्दुल्ला ने अनंतनाग के बिजबेहारा कस्बे में मीडिया से बात करते हुए उन 26 बेकसूर नागरिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्हें पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने मार डाला था।

पहलगाम आतंकी हमले ने भारत और पाकिस्तान को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र बलों को इन हत्याओं का बदला लेने के लिए पूरी छूट दे दी थी।

'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय सशस्त्र बलों ने लाहौर के पास मुरीदके, बहावलपुर, और पीओके में मुजफ्फराबाद में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।

ये हमले भारतीय सशस्त्र बलों ने सीमा पार किए बिना ही किए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत में नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमला करके तनाव बढ़ा दिया।

जम्‍मू-कश्‍मीर के पुंछ जिले में, पाकिस्तानी सीमा पर हुई अंधाधुंध गोलाबारी में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सहित 14 नागरिक मारे गए। पाकिस्तानी गोलाबारी में एक मस्जिद, एक मंदिर, एक गुरुद्वारा और एक चर्च भी नष्ट हो गए।

भारत ने पाकिस्तानी रक्षा ठिकानों (जिनमें सेना के हवाई अड्डे भी शामिल थे) पर हमला करके जवाबी कार्रवाई की। भारतीय हमलों में पाकिस्तान के 18 रक्षा ठिकानों को नुकसान पहुंचा।

पहलगाम आतंकी हमले में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को सेना और जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस ने जुलाई 2025 में 'ऑपरेशन महादेव' के तहत मार गिराया। यह ऑपरेशन श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके में स्थित दाचीगाम नेशनल पार्क के पास महादेव पर्वत चोटी की तलहटी में चलाया गया था।

पहलगाम के बैसरन में हुए उस क्रूर आतंकी हमले के बाद चलाया गया 'ऑपरेशन महादेव' भारत के आतंकवाद-रोधी दृढ़ संकल्प का एक बेहतरीन उदाहरण है। 93 दिनों की लगातार खोजबीन के बाद इस ऑपरेशन के जरिए पीड़ितों को आखिरकार इंसाफ मिला।

प्रत्यक्षदर्शियों की गवाहियों और इंटेलिजेंस इनपुट्स से मिली जानकारी के आधार पर सुलेमान शाह, हमजा अफगानी, और जिब्रान भाई की पहचान पहलगाम आतंकी हमले के दोषियों के रूप में की गई है। ये तीनों लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे।

'ऑपरेशन महादेव' हाल के वर्षों में चलाए गए सबसे बड़े आतंकवाद-विरोधी अभियानों में से एक था। सुरक्षा बलों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों के भागने के सभी रास्तों को सील कर दिया, ताकि वे कश्मीर घाटी से बाहर न निकल सकें।

खुफिया एजेंसियों ने हमलावरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 'ह्यूमन इंटेलिजेंस', 'टेक्निकल इंटेलिजेंस' और हमले में बचे लोगों के बयानों का मिला-जुला इस्तेमाल किया।

जैसे-जैसे ऑपरेशन आगे बढ़ा, आतंकवादियों का पता दक्षिण कश्मीर के ऊपरी इलाकों (जिनमें हपतणार, बुगमार और त्राल शामिल हैं) में चला। आखिरकार, उन्होंने दाचीगाम के पास 'महादेव रिज' से सटे घने जंगलों में पनाह ले ली।

ऊंची चोटियों और घनी झाड़ियों वाले इस दुर्गम इलाके ने सुरक्षा बलों की आवाजाही को धीमा जरूर कर दिया था, लेकिन साथ ही इससे तलाशी के लिए निर्धारित क्षेत्र को सीमित करने में भी मदद मिली।

28 जुलाई 2025 को लगभग तीन महीने तक 250 किलोमीटर से ज्‍यादा की दूरी तक पीछा करने के बाद 'पैरा' (विशेष बल) की एक टीम ने घने जंगलों के भीतर एक सटीक और सुनियोजित ऑपरेशन को अंजाम दिया।

घंटों तक बेहद सावधानी और खामोशी से आगे बढ़ते हुए टीम ने तीनों आतंकवादियों को घेरकर मार गिराया। इस तरह, पहलगाम नरसंहार के लिए जिम्मेदार इन दोषियों को उनके किए की सजा मिली।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी