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विपक्षी दलों को दिलचस्पी सिर्फ सत्ता में, लोगों के भलाई में नहीं: मुख्यमंत्री माणिक साहा

अगरतला, 6 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने रविवार को विपक्षी दलों पर राजनीति की बुनियादी समझ न होने का आरोप लगाया और कहा कि वे सिर्फ लोगों को गुमराह करने के लिए राजनीति कर रहे हैं।
 

अगरतला, 6 सितंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने रविवार को विपक्षी दलों पर राजनीति की बुनियादी समझ न होने का आरोप लगाया और कहा कि वे सिर्फ लोगों को गुमराह करने के लिए राजनीति कर रहे हैं।

अगरतला के बाहरी इलाके बरजाला में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम साहा ने कहा कि राज्य के लोगों ने सीपीआई-एम के लंबे शासनकाल के दौरान बहुत मुश्किल और खतरनाक हालात देखे हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे सामने कई चुनाव आने वाले हैं। विलेज कमेटी के चुनाव होने वाले हैं, और हम एनडीए गठबंधन के साथ मिलकर ये चुनाव लड़ेंगे। लेकिन कुछ समय से 'बांटो और राज करो' की स्थिति बनाने की कोशिशें हो रही हैं। लोगों को याद होगा कि 1978 में सीपीआई-एम ने कैसे सरकार बनाई थी। उन्होंने 35 साल तक राज्य पर शासन किया। हर जगह लाल झंडे और लाल संकेत थे, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भी।

उन्होंने कहा कि लोग उन्हें (सीपीआई-एम) कभी स्वीकार नहीं करेंगे। वे अभी भी 1978 वाली सोच ही लेकर चल रहे हैं कि कैसे सत्ता में आएं और सरकार बनाएं, और इसके लिए तरह-तरह की कोशिशें की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अब सीपीआई-एम के साथ गठबंधन कर लिया है और आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को सिर्फ सत्ता में दिलचस्पी है।

उन्होंने कहा कि इस कांग्रेस ने अब सीपीआई-एम के साथ गठबंधन कर लिया है। उन्हें बस कुर्सी या सत्ता चाहिए और वे साजिशें रच रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में हमने देखा था कि कांग्रेस पार्टी के दफ्तरों से सीपीआई-एम के झंडे निकाले जा रहे थे और इसके उलट भी हो रहा था।

मुख्यमंत्री साहा ने कहा कि भाजपा देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और दुनिया भर में इसकी मौजूदगी बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा का ग्राफ ऊपर जा रहा है। विलेज कमिटी चुनावों के बाद, अगरतला म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और नगर पंचायतों समेत लोकल बॉडी के चुनाव होंगे। पिछली बार हमने सभी 20 सीटें जीती थीं। इस बार भी ऐसा ही होगा।

मुख्यमंत्री साहा ने कहा कि लोकतंत्र में लोग ऐसे नेता और राजनीतिक पार्टियां चाहते हैं जिन पर वे भरोसा और विश्वास कर सकें।

--आईएएनएस

एमएस/