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एक सही वोट से असम की संस्कृति को मिल सकता है वैश्विक मंच: सीएम सरमा

गुवाहाटी, 6 मार्च (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व पर कहा कि सही राजनीतिक निर्णय असम की परंपराओं को स्थानीय जड़ों से वैश्विक मंच तक ले जाने में मदद कर सकता है।
 
एक सही वोट से असम की संस्कृति को मिल सकता है वैश्विक मंच: सीएम सरमा

गुवाहाटी, 6 मार्च (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व पर कहा कि सही राजनीतिक निर्णय असम की परंपराओं को स्थानीय जड़ों से वैश्विक मंच तक ले जाने में मदद कर सकता है।

मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, "असम की जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं को पहले ही अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिल चुकी है और ये राज्य के लोगों को गौरवान्वित करती रहती हैं। एक वोट का अधिकार असम की संस्कृति को हमारी धरती से विश्व मंच तक ले जा सकता है।"

असम की कुछ प्रमुख पारंपरिक कला शैलियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिहू, झुमोइर और बागुरुम्बा जैसे त्योहार और लोक नृत्य न केवल असमिया पहचान का अभिन्न अंग बने हुए हैं, बल्कि हाल के वर्षों में इन्होंने वैश्विक ध्यान भी आकर्षित किया है।

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि ये सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां असम की भावना और विविधता का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो विभिन्न समुदायों की परंपराओं को दर्शाती हैं जिन्होंने राज्य की अनूठी विरासत में योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को संरक्षित रखने और व्यापक मंचों पर बढ़ावा देने के प्रयास जारी रहेंगे। बिहू से लेकर झुमोइर और बागुरुम्बा तक, हमारी परंपराओं ने वैश्विक रिकॉर्ड बनाए हैं और वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है, जिससे हर असमिया को गर्व महसूस होता है।

मुख्यमंत्री ने सांस्कृतिक प्रोत्साहन को राजनीतिक विकल्पों से भी जोड़ा और लोगों से "समझदारी से चुनाव करने" का आग्रह करते हुए अपने संदेश में चूज भाजपा हैशटैग का इस्तेमाल किया।

असम की सांस्कृतिक विरासत अपनी समृद्ध लोक परंपराओं, संगीत और नृत्य शैलियों के लिए व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है, जो कृषि कैलेंडर और सामुदायिक जीवन से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई हैं।

राज्य का सबसे प्रसिद्ध त्योहार बिहू खुशी, फसल और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जबकि झुमॉयर और बागुरुम्बा जैसे नृत्य क्रमशः चाय जनजाति और बोडो समुदायों की सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करते हैं।

हाल के वर्षों में, असम के कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है, जिससे राज्य की विरासत को व्यापक मंचों पर प्रदर्शित करने में मदद मिली है।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि असम की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और इसे राज्य और देश से परे दर्शकों से जोड़ने के लिए पारंपरिक कला रूपों को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के निरंतर प्रयास आवश्यक बने रहेंगे।

--आईएएनएस

एसएके/पीयूष