बेंगलुरु में बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी का आधार क्या है? प्रियंक खड़गे ने भाजपा से पूछा सवाल
बेंगलुरु, 5 जनवरी (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार पर बेंगलुरु में कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों को मकान देने के आरोपों को लेकर भाजपा नेताओं पर पलटवार करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज (आरडीपीआर), आईटी और बीटी मंत्री प्रियंक खड़गे ने सोमवार को सवाल किया कि भाजपा किस आधार पर यह दावा कर रही है कि शहर में बांग्लादेशी घुसपैठिए मौजूद हैं।
बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत में मंत्री खड़गे ने कहा, “अवैध घुसपैठियों से उनका क्या मतलब है? क्या वे निश्चित हैं कि यहां अवैध घुसपैठिए हैं? अवैध घुसपैठ रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं है? लोग भारत में कैसे प्रवेश कर रहे हैं?”
उन्होंने आगे कहा, “क्या भाजपा यह संकेत देना चाहती है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपना काम नहीं कर रहे हैं और सीमाओं की सुरक्षा में विफल रहे हैं? किस आधार पर भाजपा नेता यह कह रहे हैं कि ये लोग अवैध घुसपैठिए हैं? अगर वे वास्तव में अवैध हैं, तो कानून अपना काम करेगा।”
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए खड़गे ने सवाल किया, “लेकिन देश के गृह मंत्री क्या कर रहे हैं? लोग सीमाओं को पार कर भाजपा-शासित राज्यों से होते हुए बेंगलुरु तक कैसे पहुंच रहे हैं? यह कैसे संभव है? इससे साफ होता है कि केंद्र की सरकार पूरी तरह अक्षम है।”
बेंगलुरु में ओम शक्ति श्रद्धालुओं से जुड़े पत्थरबाजी की घटना पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि दोषी चाहे किसी भी धर्म के हों, यदि वे अपराधी पाए जाते हैं तो उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिसने भी यह कृत्य किया है, यदि उसके पीछे दुर्भावनापूर्ण मंशा है, तो उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”
गौरतलब है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने और अतिक्रमणकारियों के पुनर्वास को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा विधायक सी.एन. अश्वथ नारायण ने आरोप लगाया था कि सभी अतिक्रमणकारी बांग्लादेशी हैं और कर्नाटक सरकार गरीबों को मकान देने के बहाने मुद्दे को भटका रही है।
अश्वथ नारायण ने दावा किया था, “सभी अतिक्रमणकारी बांग्लादेशी हैं। तकनीकी रूप से कोई भी मकान आवंटन का पात्र नहीं है। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराई जानी चाहिए। अगर मैं गलत हूं तो कोई भी मुझे चुनौती दे सकता है। विभाग में इसकी एक रिपोर्ट है। उनसे पूछिए। यहां करीब 25 लाख बांग्लादेशी हैं। यह आंकड़ा सुनकर आप चौंक सकते हैं, लेकिन मैं यह बयान जिम्मेदारी से दे रहा हूं, किसी सामान्य टिप्पणी के तौर पर नहीं।”
--आईएएनएस
डीएससी
