थिरुवोणम के दिन पलक्कड़ रेल डिवीजन के बंटवारे के विरोध में भूख हड़ताल पर कांग्रेस सांसद
पलक्कड़, 26 अगस्त (आईएएनएस)। मलयाली लोगों के लिए साल के सबसे अहम दिन जब पूरे केरल में परिवार पारंपरिक ओणम दावत का आनंद लेते हैं, तब उत्तरी केरल के कांग्रेस सांसद भूख हड़ताल पर रहेंगे। वे पलक्कड़ रेलवे डिवीजन के प्रस्तावित पुनर्गठन का विरोध करने के लिए 26 तरह के व्यंजनों वाली थिरुवोणम साद्य (दावत) के बजाय विरोध-प्रदर्शन को चुन रहे हैं।
यूडीएफ ने रेलवे बोर्ड के उस फैसले का कड़ा विरोध किया है, जिसके तहत मंगलुरु स्टेशन समेत कई इलाकों को पलक्कड़ डिवीजन से हटाकर साउथ वेस्टर्न रेलवे के मैसूरु डिवीजन में ट्रांसफर किया जा रहा है।
सांसदों ने बुधवार सुबह भूख हड़ताल शुरू की और आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने यह फैसला कर्नाटक में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर लिया है।
यह विरोध-प्रदर्शन इसलिए भी अहम है क्योंकि यह केरल के सबसे बड़े त्योहार थिरुवोणम के दिन हो रहा है, जब पारंपरिक साद्य (दावत) पारिवारिक जश्न का मुख्य हिस्सा होती है।
सांसदों का इस शानदार दावत को न खाने का फैसला, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ द्वारा केरल के रेलवे हितों के लिए एक बड़ा झटका माने जाने वाले कदम के खिलाफ विरोध का एक प्रतीकात्मक तरीका माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर रेलवे बोर्ड के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
उन्होंने बताया कि इतने अहम फैसले से पहले केरल सरकार से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया, जबकि इस फैसले का राज्य के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और भविष्य के विकास की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।
इस विवाद के केंद्र में आर्थिक असर का मुद्दा है।
माना जा रहा है कि इस बदलाव से मैसूरु डिवीजन को सालाना 500-600 करोड़ रुपए की अतिरिक्त कमाई होगी, जबकि पलक्कड़ डिवीजन को पनामबूर और दूसरे इलाकों के हाथ से निकल जाने के कारण सालाना करीब 1,100 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।
पलक्कड़ डिवीजन मुख्य रूप से माल ढुलाई (फ्रेट ट्रैफिक) पर निर्भर है, जिससे उसे लगभग 90 प्रतिशत कमाई होती है।
मंगलुरु सेंट्रल और मंगलुरु जंक्शन के हाथ से निकल जाने से उसकी यात्री आय पर भी असर पड़ेगा।
यूडीएफ का तर्क है कि भले ही कुल मिलाकर रेलवे को कमाई का नुकसान न हो, क्योंकि कमाई असल में एक डिवीजन से दूसरे डिवीजन में चली जाएगी, लेकिन केरल को कमाई और रणनीतिक रूप से अहम रेलवे नेटवर्क पर अपने प्रभाव, दोनों का नुकसान उठाना पड़ेगा।
इससे भी बड़ी चिंता पलक्कड़ डिवीजन के भविष्य को लेकर है।
कमाई वाले इलाके का एक बड़ा हिस्सा दूसरी जगह ट्रांसफर हो जाने के कारण, यूडीएफ को डर है कि इसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है और आखिरकार इसके अस्तित्व पर ही सवाल उठ सकते हैं।
इसलिए, कांग्रेस सांसदों के लिए यह थिरुवोणम 'साद्य' (पारंपरिक दावत) के बारे में नहीं है। यह एक राजनीतिक संदेश देने के बारे में है, भले ही इसके लिए उन्हें उस दावत को छोड़ना पड़े जो केरल में एकजुटता के जश्न का प्रतीक है।
--आईएएनएस
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