तमिलनाडु में समद्र किनारे ओलिव रिडले कछुओं के घोंसला बनाने की प्रक्रिया तेज, अब तक 9000 अंडे मिले
चेन्नई, 18 जनवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु के तटीय डेल्टा में, खासकर मयिलादुथुराई और नागपट्टिनम जिलों में सीजन की धीमी शुरुआत के बाद ऑलिव रिडले कछुओं की घोंसला बनाने की गतिविधि अब जोर पकड़ने लगी है। ये समुद्री कछुओं की अन्य प्रजातियों की तुलना में आकार में छोटे होते हैं। इनका वजन लगभग 35–45 किलोग्राम होता है। ये मादा कछुए अंडे देने के लिए अक्सर उसी तट पर लौटते हैं जहां इनका जन्म हुआ था।
ऑलिव रिडले कछुए को भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त है।
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मयिलादुथुराई में अब तक 48 घोंसले और नागपट्टिनम में 24 घोंसले रिकॉर्ड किए गए हैं, जिससे इस सीजन में जमा किए गए अंडों की कुल संख्या 9,000 से ज्यादा हो गई है।
खासकर मयिलादुथुराई में घोंसला बनाने का मौसम सामान्य से देर से शुरू हुआ। जहां नागपट्टिनम में 13 दिसंबर 2025 को पहला घोंसला देखा गया, वहीं मयिलादुथुराई में पहला घोंसला 31 दिसंबर, 2025 को ही रिकॉर्ड किया गया।
अधिकारियों ने कछुओं के देर से आने का कारण समुद्र की खराब स्थिति और पानी भरे, सख्त समुद्र तटों को बताया, जिससे मौसम के शुरुआती दौर में कछुओं के लिए किनारे पर आकर अंडे देना मुश्किल हो गया था।
अब समुद्र की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, इसलिए अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में घोंसला बनाने की गतिविधि तेज होगी।
फरवरी को पारंपरिक रूप से इस तट पर घोंसला बनाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे ज्वार और मौसम की स्थिति बेहतर होगी और भी कछुए आएंगे।
मयिलादुथुराई में अब तक पहचाने गए 48 घोंसलों से 5,750 अंडे सुरक्षित किए गए हैं। नागपट्टिनम में घोंसला बनाने की गतिविधि पहले शुरू हो गई थी, लेकिन यह सामान्य रही है, और अब तक 24 घोंसलों से 3,574 अंडे जमा किए गए हैं।
हालांकि, पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश के कारण रात की पेट्रोलिंग और मॉनिटरिंग में रुकावट आई है, जिसके चलते इस दौरान घोंसलों की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।
वन अधिकारियों को उम्मीद है कि वीकेंड पर अमावस्या के साथ ही घोंसला बनाने की गतिविधि में बढ़ोतरी होगी। ओलिव रिडले कछुए अमावस्या और पूर्णिमा के दौरान बड़ी संख्या में किनारे पर आते हैं, जब ज्वार-भाटा के कारण पानी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे कछुओं के लिए अपने घोंसले वाले समुद्र तटों तक पहुंचना आसान हो जाता है।
नागपट्टिनम जिले में अभी नौ हैचरी चल रही हैं, जिनमें नागपट्टिनम और वेदारण्यम वन क्षेत्रों में पांच स्थायी और चार अस्थायी सुविधाएं शामिल हैं। मयिलादुथुराई में 11 हैचरी चल रही हैं, जिनमें सिरकाजी और मयिलादुथुराई वन क्षेत्रों में तीन स्थायी और आठ अस्थायी इकाइयां शामिल हैं।
--आईएएनएस
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