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मलकानगिरी जातीय हिंसा के बाद ओडिशा सरकार ने आदिवासियों की शिकायतों पर कई बड़े फैसले लिए

भुवनेश्वर, 2 जनवरी (आईएएनएस)। पिछले महीने आदिवासी बहुल मलकानगिरी जिले में हुई बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा के बाद, ओडिशा सरकार ने गुरुवार को जिले के आदिवासियों की अलग-अलग शिकायतों को दूर करने के लिए कई फैसले लिए।
 
मलकानगिरी जातीय हिंसा के बाद ओडिशा सरकार ने आदिवासियों की शिकायतों पर कई बड़े फैसले लिए

भुवनेश्वर, 2 जनवरी (आईएएनएस)। पिछले महीने आदिवासी बहुल मलकानगिरी जिले में हुई बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा के बाद, ओडिशा सरकार ने गुरुवार को जिले के आदिवासियों की अलग-अलग शिकायतों को दूर करने के लिए कई फैसले लिए।

ख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में लोक सेवा भवन में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में ये फैसले लिए गए।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह तय किया गया कि मलकानगिरी जिले के कलेक्टर सोमेश कुमार उपाध्याय हर पखवाड़े रेगुलेशन 2/56 (2002 में संशोधित) के तहत सैकड़ों लंबित मामलों की समीक्षा करेंगे। साथ ही इसकी प्रगति के बारे में दक्षिणी राजस्व संभागीय आयुक्त संग्राम केशरी महापात्रा और राज्य सरकार को जानकारी देंगे।

राज्य सरकार ने राज्य में भूमिहीन और बेघर आदिवासी परिवारों को स्थायी भूमि पट्टे देने का भी फैसला किया है।

सीएमओ ने आगे कहा, "एफआरए (वन अधिकार अधिनियम) और ओजीएलएस (ओडिशा सरकारी भूमि बंदोबस्त अधिनियम) के तहत स्थायी 'पट्टे' प्रदान करने के लिए शीघ्र व्यवस्था की जाएगी। जिला कलेक्टर हर महीने प्रगति की समीक्षा करेंगे और राज्य सरकार को सूचित करेंगे।"

ओडिशा सरकार ने मच्छकुंड सिंचाई परियोजना से विस्थापित परिवारों को स्थायी 'पट्टे' देने का भी संकल्प लिया।

राज्य की उच्च-स्तरीय बैठक के फैसलों के अनुसार, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, देवरंजन कुमार सिंह, मलकानगिरी जिले के सभी राजस्व संबंधी मामलों की तिमाही समीक्षा करेंगे और राज्य सरकार को रिपोर्ट देंगे।

सीएमओ ने कहा, "जल संसाधन विभाग आने वाले दिनों में जल निकायों के पास स्थित आदिवासी और अन्य समुदायों की ऊपरी कृषि भूमि को सिंचाई सुविधाएं प्रदान करने के लिए कदम उठाएगा।"

राज्य सरकार ने यह भी फैसला किया कि यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की जाएगी कि आदिवासी आवेदक मुख्यमंत्री कृषि विकास योजना, पीएमईजीपी (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम), और पीएमएफएमई (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकीकरण) से लाभान्वित हो सकें।

राज्य स्कूल और जन शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक विद्यालय स्तर पर कोया, दिदायी और बोंडा आदिवासी भाषाओं में खाली बहुभाषी शिक्षा शिक्षक पदों को तुरंत भरा जाएगा।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने मलकानगिरी जिले के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अधिक सीटें बनाने का संकल्प लिया ताकि आदिवासी और अन्य छात्र कक्षा 10 के बाद अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

--आईएएनएस

एससीएच