ओडिशा ग्रामीण बैंक के चेयरमैन ने क्योंझर घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया, कानूनी उत्तराधिकार प्रक्रिया को किया स्पष्ट
भुवनेश्वर, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। ओडिशा ग्रामीण बैंक के चेयरमैन ऋषि सिंह ने मंगलवार को क्योंझर में हुई हालिया घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया, जहां एक व्यक्ति कथित तौर पर अपनी मृत बहन का कंकाल बैंक की शाखा में कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में अपना दावा स्थापित करने के लिए लेकर आया था। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक ने उचित प्रक्रियाओं का पालन किया।
ऋषि सिंह ने घटनाक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि वह व्यक्ति पहले शाखा में आया था और एक महिला के नाम पर दर्ज खाते से पैसे निकालने की कोशिश कर रहा था। शाखा प्रबंधक ने उसे बताया कि वह तीसरे पक्ष के रूप में धनराशि जमा या निकाल नहीं सकता और इसके लिए खाताधारक की उपस्थिति आवश्यक है या उसे उचित कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
चेयरमैन ने बताया कि उस व्यक्ति ने शुरू में अपनी बहन की हालत के बारे में विरोधाभासी बयान दिए। एक बार उसने कहा कि वह बीमार है और बाद में उसने कहा कि उसकी मृत्यु हो गई है। बैंक अधिकारियों ने उसे बताया कि खाताधारक की मृत्यु होने पर वैध दस्तावेज, जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र जमा करने पर ही धनराशि जारी की जा सकती है।
उन्होंने कहा, "समझाने-बुझाने के बावजूद वह नहीं माना और बाद में अपनी बहन के शव होने का दावा करते हुए उसे लेकर लौटा। इस घटना से बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों में दहशत फैल गई, जिसके बाद स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने हस्तक्षेप किया और स्थिति को संभाला।"
सिंह ने बैंक की स्थिति स्पष्ट करते हुए इस बात पर जोर दिया कि व्यक्ति को परेशान करने का कोई इरादा नहीं था।
उन्होंने आगे कहा, "बैंक स्थापित निपटान प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए बाध्य हैं। भुगतान केवल सत्यापित कानूनी वारिसों या नामित व्यक्तियों को ही उचित प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकता है। यह सार्वजनिक धन है, और यह सही हकदार को ही मिलना चाहिए।"
उन्होंने आगे बताया कि खाते से जुड़ा नामांकित व्यक्ति भी मृत बताया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया और भी जटिल हो गई है। दावेदार से सक्षम स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी किया गया कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया है, जो ऐसे मामलों में निपटान के लिए अनिवार्य है।
सिंह के अनुसार, यह मामला कुछ समय से विचाराधीन था और याचिकाकर्ता को पहले ही आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने की सलाह दी गई थी। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों से पुष्टि लंबित होने के कारण आवश्यक प्रमाण पत्र अभी तक जमा नहीं किया गया है।
बैंक ने आंतरिक जांच की है और क्षेत्रीय प्रबंधकों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने शाखा का दौरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत की है। सिंह ने आश्वासन दिया कि उचित सत्यापन पूरा होने और प्रशासन द्वारा कानूनी वारिसों की पुष्टि होने के बाद भुगतान बिना किसी देरी के कर दिया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी होते ही सही लाभार्थी को पैसा मिल जाए।"
एक आदिवासी व्यक्ति ने अपनी मृत बहन का कंकाल निकालकर ग्रामीण बैंक के सामने विरोध प्रदर्शन किया, ताकि उसे जमा किए गए पैसे वापस मिल सकें। यह घटना सोमवार दोपहर करीब 1 बजे पटना पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले मल्लिपासी गांव में घटी।
कंकाल देखकर बैंक अधिकारी भयभीत हो गए और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस दल मौके पर पहुंचा। बाद में पुलिस से बातचीत के बाद उस व्यक्ति ने कंकाल वापस ले लिया और उसे सही जगह पर दोबारा दफना दिया।
पुलिस के अनुसार, जीतू की बहन की मृत्यु दो महीने पहले हुई थी। मलिपासी के एक ग्रामीण बैंक में उसका खाता था, जिसमें 19,300 रुपए जमा थे। उसकी मृत्यु के बाद जीतू बैंक से पैसे निकालने गया, लेकिन बैंक अधिकारी ने पैसे देने से इनकार कर दिया क्योंकि खाता उसकी बहन के नाम पर था। बैंक अधिकारी ने उससे पैसे निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज लाने को कहा। जीतू को यह बात समझ नहीं आई, क्योंकि वह अनपढ़ था।
पुलिस ने बताया कि मृत्यु प्रमाण पत्र पेश करने के बजाय उसने कब्र खोदी, हड्डियों को एक बोरी में भरकर बैंक अधिकारी को सबूत के तौर पर पेश कर दिया।
--आईएएनएस
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