विलय का कोई प्रस्ताव न भेजा गया और न ही प्राप्त हुआ: सुप्रिया सुले
नागपुर, 13 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले तीव्र राजनीतिक गहमागहमी के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में संभावित विलय को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
इन अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी (एसपी) की वरिष्ठ कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने स्पष्ट रूप से ऐसी किसी भी घटना का खंडन किया और कहा कि उनकी पार्टी को ऐसा कोई प्रस्ताव न तो भेजा गया है और न ही प्राप्त हुआ है।
मीडिया से बात करते हुए सुले ने कहा कि किसी ने भी किसी विधायक, सांसद या किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं किया है, न ही उनकी पार्टी ने किसी से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि चर्चा कहां से शुरू हुई या किसने इसकी पहल की।
उन्होंने आगे कहा कि पार्टी प्रमुख शरद पवार को न तो कांग्रेस से कोई विलय प्रस्ताव मिला है और न ही उन्होंने उन्हें ऐसा कोई प्रस्ताव भेजा है।
तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में विलय या घनिष्ठ गठबंधन की राष्ट्रीय स्तर पर फैली अफवाहों के बारे में पूछे जाने पर सुले ने अटकलें लगाने से परहेज किया।
उन्होंने कहा कि हालांकि तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने हाल ही में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ एक निजी बैठक की थी, लेकिन उन्हें उनकी आंतरिक बातचीत की जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि उस बैठक में केवल दोनों नेता ही मौजूद थीं, और उन्हें यह भी नहीं पता कि क्या उन्होंने विलय के संबंध में मीडिया को कुछ बताया था और न ही उन्होंने इस बारे में कोई पुख्ता खबर पढ़ी है।
सुले ने दोहराया कि उनकी ओर से विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी और न ही उन्हें ऐसा कोई प्रस्ताव मिला था। उन्होंने कहा कि उन्हें सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच हुई बातचीत की जानकारी नहीं है, और न ही किसी ने उनसे संपर्क किया था और न ही शरद पवार की ओर से कोई प्रस्ताव दिया गया था या भेजा गया था।
भारत में मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए धर्मनिरपेक्ष, समान विचारधारा वाली क्षेत्रीय पार्टियों के विलय की संभावना पर पूछे जाने पर, सुले ने पक्षपातपूर्ण राजनीति के बजाय सार्वजनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।
उन्होंने तर्क दिया कि देश की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्थिति दयनीय है। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक दांव-पेच खेलने का समय नहीं है और देश को बचाने की तत्काल आवश्यकता है।
उन्होंने मुद्रास्फीति, बढ़ती बेरोजगारी, व्यापक भ्रष्टाचार और लगातार हो रहे दस्तावेजों के लीक होने को नागरिकों के सामने मौजूद गंभीर संकट बताया। उन्होंने कहा कि देश को यह विचार करना होगा कि क्या वह आंतरिक संघर्ष जारी रखना चाहता है या इन समस्याओं के समाधान के लिए कदम उठाना चाहता है।
--आईएएनएस
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