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नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हेरफेर के कोई सबूत नहीं मिले, यह बाजार के लिए बड़ा सुधार: सेबी प्रमुख

मुंबई, 12 अगस्त (आईएएनएस)। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को कहा कि शेयर बाजारों में हाल ही में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) में किसी प्रकार की हेरफेर या अनियमितता के प्रमाण नहीं मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भारतीय पूंजी बाजार की संरचना में किया गया एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो देश के बाजारों को वैश्विक मानकों के और करीब लाता है।
 

मुंबई, 12 अगस्त (आईएएनएस)। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को कहा कि शेयर बाजारों में हाल ही में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) में किसी प्रकार की हेरफेर या अनियमितता के प्रमाण नहीं मिले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भारतीय पूंजी बाजार की संरचना में किया गया एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो देश के बाजारों को वैश्विक मानकों के और करीब लाता है।

मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पांडे ने कहा कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन भारतीय पूंजी बाजार की संरचना में किया गया एक महत्वपूर्ण सुधार है, जो भारतीय बाजारों को वैश्विक मानकों के और करीब ले जाता है।

उन्होंने कहा, "सीएएस बाजार की माइक्रोस्ट्रक्चर में एक बहुत बड़ा सुधार है और हम इसके पीछे मजबूती से खड़े हैं। दुनिया के कई प्रमुख बाजार पहले से इस व्यवस्था को अपना चुके हैं। जापान ने इसे 2024 में लागू किया, जबकि हांगकांग, अमेरिका, जर्मनी, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी यह प्रणाली मौजूद है।"

सेबी प्रमुख ने बताया कि क्लोजिंग प्राइस का उचित निर्धारण बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी के आधार पर विभिन्न शेयर सूचकांकों, पैसिव निवेश उत्पादों और म्यूचुअल फंडों की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) तय होती है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल सबसे बड़ा फोकस इस नई व्यवस्था में बाजार सहभागिता बढ़ाने पर है। उनके अनुसार, अधिक से अधिक निवेशकों, ब्रोकरों और बाजार प्रतिभागियों को इस प्रणाली को समझने और इसमें भाग लेने की आवश्यकता है।

पांडे ने कहा, "कई ब्रोकरों ने संकेत दिए हैं कि भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है। सीएएस एक पूरी तरह पारदर्शी बाजार व्यवस्था है, जहां कीमतों का निर्धारण खुली प्रक्रिया के जरिए होता है। इसमें हर गतिविधि दिखाई देती है और अंत में एक निष्पक्ष मूल्य सामने आता है।"

उन्होंने बताया कि सेबी लगातार विभिन्न हितधारकों से बातचीत कर रही है और सभी सुझावों तथा फीडबैक पर विचार किया जा रहा है। यदि भागीदारी बढ़ाने या प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए किसी अतिरिक्त कदम की आवश्यकता होगी, तो उस पर भी विचार किया जाएगा।

गौरतलब है कि स्टॉक एक्सचेंजों ने पिछले सप्ताह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत की थी। इस नई व्यवस्था के तहत नियमित कारोबार के बाद 20 मिनट का विशेष सत्र आयोजित किया जाता है, जिसमें खरीद और बिक्री के ऑर्डर एकत्र किए जाते हैं।

इसके बाद उस स्तर पर क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है, जहां सबसे अधिक मात्रा में सौदों का मिलान संभव हो सके। इससे बाजार बंद होने के समय अधिक सटीक और निष्पक्ष मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।

नई प्रणाली ने पुरानी व्यवस्था की जगह ली है, जिसमें किसी शेयर का क्लोजिंग प्राइस नियमित कारोबार के अंतिम 30 मिनट में हुए सौदों के भारित औसत मूल्य (वेटेड एवरेज प्राइस) के आधार पर तय किया जाता था।

नियामकों और स्टॉक एक्सचेंजों का मानना है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, कुशल और निष्पक्ष बनेगी, विशेष रूप से बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए, जिनके बड़े ऑर्डर अक्सर बाजार बंद होने के समय निष्पादित होते हैं।

तुहिन कांत पांडे ने दोहराया कि सेबी इस नई व्यवस्था की लगातार निगरानी कर रही है और फिलहाल ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है जिससे बाजार में हेरफेर की आशंका जाहिर हो। उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे-जैसे अधिक निवेशक और ब्रोकर इस प्रणाली को समझेंगे और इसमें भागीदारी बढ़ेगी, यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण और सफल सुधार साबित होगी।

--आईएएनएस

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