असम में अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में संगठन का विस्तार करेगी भाजपा, विचारधारा से समझौता नहीं: हिमंत बिस्वा सरमा
गुवाहाटी, 3 नवंबर (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अपना संगठनात्मक विस्तार जारी रखेगी, लेकिन इसके लिए पार्टी अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी लाभ के लिए पार्टी अपने मूल सिद्धांतों को कमजोर नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री सरमा ने मंगलवार को गुवाहाटी में आयोजित भाजपा की कोर कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में पार्टी के वोट प्रतिशत में वृद्धि हुई है। यह इन इलाकों में भाजपा की बढ़ती राजनीतिक और संगठनात्मक मौजूदगी को दर्शाता है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मतदाताओं को आकर्षित करने या चुनावी संभावनाओं को मजबूत करने के लिए पार्टी अपनी वैचारिक स्थिति में बदलाव नहीं करेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश था कि संगठन का विस्तार जारी रहेगा, लेकिन विचारधारा से कोई समझौता नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक मुद्दों पर भी राज्य सरकार का रुख दोहराया। उन्होंने विशेष रूप से बाल विवाह और बहुविवाह का जिक्र करते हुए कहा कि इन प्रथाओं को समाप्त करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह और बहुविवाह को रोका जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि अल्पसंख्यक बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने के बावजूद भाजपा इन मुद्दों पर अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी।
मुख्यमंत्री की ये टिप्पणियां असम में भाजपा की राजनीतिक मौजूदगी को व्यापक बनाने की कोशिशों के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। पार्टी उन निर्वाचन क्षेत्रों में भी अपना आधार मजबूत करने में जुटी है, जहां अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है।
सरमा के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि भाजपा संगठनात्मक विस्तार और अपनी घोषित वैचारिक प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाए रखना चाहती है। खासकर बाल विवाह और बहुविवाह जैसे मुद्दे लंबे समय से राज्य की राजनीति में चर्चा के केंद्र में रहे हैं। असम में बाल विवाह और बहुविवाह को लेकर लगातार राजनीतिक बहस होती रही है। भाजपा सरकार इन प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए विधायी और प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए कदमों को प्रमुखता से सामने रखती रही है।
मुख्यमंत्री के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि भाजपा अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अपनी पहुंच और संगठनात्मक नेटवर्क बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी, लेकिन सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर अपना रुख बरकरार रखेगी।
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