वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को चुनौती देने का कोई आधार नहीं, एक सदस्य ने आरिफ मसूद को दिया जवाब
भोपाल, 7 जुलाई (आईएएनएस)। हाल ही में फिर से गठित मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के एक हिंदू सदस्य ने मंगलवार को कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की उस कानूनी चुनौती को खारिज कर दिया, जिसमें बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने पर सवाल उठाया गया था। उन्होंने कहा कि ये नियुक्तियां संशोधित वक्फ कानून के अनुसार की गई हैं।
मसूद के इस बयान पर कि मुस्लिम समुदाय राज्य सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा, बोर्ड के सदस्य अनिमेष भार्गव ने आईएएनएस को बताया कि किसी भी तरह की आपत्ति का कोई आधार नहीं है।
भार्गव ने मंगलवार को आईएएनएस से कहा, "यह भारत के संविधान के अनुसार किया गया है। संशोधित वक्फ कानून वक्फ बोर्ड में गड़बड़ियों को खत्म करने और वित्तीय नुकसान को रोकने के लिए लाया गया था। हमें उसी कानून के प्रावधानों के तहत नियुक्त किया गया है।"
उन्होंने कहा कि हमें नियुक्त करने के पीछे सरकार का मकसद पारदर्शिता लाना है। ऐसी बातें सामने आई हैं कि संपत्तियों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है और जमीन पर कब्जा किया गया है। इमारतों और संपत्तियों पर कब्जा तो कर लिया गया है लेकिन सही किराया नहीं दिया जा रहा है, इसलिए बोर्ड को पर्याप्त आमदनी नहीं हो रही है। हमारा मकसद इन कमियों को दूर करना और नुकसान को रोकना है। यह बात सबको पता है कि कुछ लोग लंबे समय से इन संपत्तियों पर कब्जा जमाए हुए हैं और शायद इसीलिए वे इसका विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि भविष्य में ज्यादा पारदर्शिता आने से सब कुछ सबके सामने आ जाएगा।
उन्होंने कहा कि जब पिछले साल यह संशोधन प्रस्तावित किया गया था तो भारत सरकार ने जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया था। उनकी अगुवाई में समिति ने देश भर का दौरा किया, वक्फ समितियों और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों से ऑनलाइन और व्यक्तिगत रूप से फीडबैक लिया। इसके बाद एक ड्राफ्ट तैयार किया गया।
कानूनी चुनौती की बात पर भार्गव ने आगे कहा कि जो लोग सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं, वे वही लोग हैं जो सालों से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
भार्गव का यह बयान भोपाल सेंट्रल के विधायक आरिफ मसूद द्वारा बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल करने का विरोध करने और यह घोषणा करने के एक दिन बाद आया है कि इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
मसूद ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाया, जबकि वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना मुसलमानों के धार्मिक मामलों में दखल देने जैसा है।
यह विवाद मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संशोधित वक्फ अधिनियम 2025 के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने के फैसले के बाद शुरू हुआ है। संशोधित कानून के तहत नया बोर्ड गठित करने वाला यह राज्य देश का पहला राज्य बन गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड राज्य भर में 16,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करता है, जिनमें मस्जिदें, दरगाहें, कब्रिस्तान, शैक्षणिक संस्थान और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं।
हिंदू सदस्यों को शामिल करने का कांग्रेस और कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध किया है, जिन्होंने इस कदम की वैधता पर सवाल उठाए हैं।
--आईएएनएस
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