अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से बाजार में लौटी तेजी, इस सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी में दर्ज की गई शानदार बढ़त
मुंबई, 13 जून (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर निवेशकों में बढ़ते भरोसे और ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में इस सप्ताह शानदार बढ़त दर्ज की गई। लगातार दो सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार में मजबूती देखने को मिली।
निफ्टी इस सप्ताह 1.10 प्रतिशत चढ़ा और आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 1.99 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ 23,623 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, सेंसेक्स 1,695 अंक यानी 2.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,528 पर बंद हुआ, इस तरह इस पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 1.73 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक चुनौतियों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई। इस दौरान लार्ज-कैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि हालिया तेज रैली के बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में इस सप्ताह कुछ नरमी आई, लेकिन लगातार बने महंगाई दबाव और मजबूत रोजगार आंकड़ों के कारण ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें फिलहाल टलती नजर आ रही हैं।
एक विश्लेषक ने कहा, "भारतीय शेयर बाजार पूरे सप्ताह सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और हल्के नकारात्मक रुख के बावजूद सप्ताह के अंत में इसमें अच्छी रिकवरी देखने को मिली।"
इस बीच, भारतीय बॉन्ड यील्ड में भी गिरावट आई, जिसका कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की नीतियों से बाजार में बढ़ी तरलता और ऋण बाजार में विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी रही।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो वित्तीय क्षेत्र सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निजी बैंकों में सकारात्मक नियामकीय घटनाक्रम और निवेशकों के रक्षात्मक रुख के कारण इन शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके साथ ही, एफएमसीजी शेयरों में भी कीमतों को बनाए रखने की क्षमता के कारण तेजी दर्ज की गई।
दूसरी ओर, आईटी सेक्टर में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। वहीं, चीन में मांग कमजोर रहने की आशंकाओं और कमोडिटी कीमतों में नरमी के कारण मेटल शेयरों पर दबाव बना रहा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली की रफ्तार और कम होती है या अमेरिकी फेड की नीतियों को लेकर स्पष्टता बढ़ती है, तो घरेलू शेयर बाजार को और समर्थन मिल सकता है।
पूरे सप्ताह के दौरान एफआईआई ने करीब 15,300 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जो बाजार के लिए एक प्रमुख चुनौती बना रहा। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिनों में बिकवाली की गति कुछ धीमी पड़ गई।
इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मजबूत खरीदारी जारी रखी और सप्ताह के दौरान करीब 24,000 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया।
व्यापक बाजार सूचकांकों का प्रदर्शन भी प्रमुख सूचकांकों के अनुरूप रहा। निफ्टी मिडकैप-100 इंडेक्स में 0.98 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 इंडेक्स 0.48 प्रतिशत मजबूत हुआ।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस रहेगा। वहीं, 23,550 से 23,500 का क्षेत्र तत्काल समर्थन (इमीडिएट सपोर्ट) का काम कर सकता है।
बैंक निफ्टी में 56,900 से 57,000 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 56,500 से 56,400 का दायरा इमीडिएट सपोर्ट क्षेत्र बना हुआ है।
निवेशकों की नजर अब घरेलू थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) महंगाई के आंकड़ों, चीन के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसले पर रहेगी, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
--आईएएनएस
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