Aapka Rajasthan

श्री जगन्नाथ मंदिर भूमि प्रबंधन के लिए ओडिशा कैबिनेट ने नए नियमों को दी मंजूरी

भुवनेश्वर, 8 सितंबर (आईएएनएस)। ओडिशा मंत्रिमंडल ने श्री जगन्नाथ मंदिर भूमि प्रबंधन नियम, 2026 को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य ओडिशा भर में श्री जगन्नाथ मंदिर (एसजेटी) की भूमि के प्रबंधन और निपटान में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता लाना है। सोमवार शाम को मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इन नियमों को मंजूरी मिल गई।
 

भुवनेश्वर, 8 सितंबर (आईएएनएस)। ओडिशा मंत्रिमंडल ने श्री जगन्नाथ मंदिर भूमि प्रबंधन नियम, 2026 को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य ओडिशा भर में श्री जगन्नाथ मंदिर (एसजेटी) की भूमि के प्रबंधन और निपटान में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता लाना है। सोमवार शाम को मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इन नियमों को मंजूरी मिल गई।

आधिकारिक बयान के अनुसार, श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम, 1955 की धारा 32 के साथ धारा 16 की उपधारा (2) के तहत नए नियम बनाए गए हैं, जो समान नीति, 2003 और संशोधित समान नीति, 2019 का स्थान लेते हैं।

सरकार ने कहा कि नए नियमों के तहत एसजेटी भूमि के निपटान के लिए आवेदनों की प्राप्ति, सत्यापन और निपटान के लिए पूरी तरह से ऑनलाइन, पोर्टल-आधारित प्रणाली स्थापित की गई है।

नियमों के अनुसार, कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय भूमि उप-समिति (डीएलएससी) और प्रत्येक आवेदन के क्षेत्र सत्यापन और जांच के लिए जिला स्तर पर एक श्री जगन्नाथ महाप्रभु भूमि संचालन समिति (एसजेएमबीएससी) का गठन अनिवार्य है।

नए नियमों के तहत, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (एसजेटीएमसी) सभी बस्तियों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करेगी, जिससे संस्थागत निगरानी सुनिश्चित होगी।

नियमों में सेवकों, मठों, गैर-सेवकों और अन्य लाभार्थियों के लिए बेंचमार्क मूल्य (बीएमवी) और औसत भूमि बिक्री सांख्यिकी (एएलएसएस) में से जो भी अधिक हो, उसके आधार पर मूल्यांकन निर्धारित किया गया है। 0.250 डेसिमल तक की व्यावसायिक भूमि का मूल्यांकन बीएमवी या एएलएसएस (जो भी अधिक हो) के चार गुना के हिसाब से किया जाएगा। 30 वर्षों से अधिक समय से निरंतर कब्जे वाले सेवा पूजा युक्त मठों की बिजेस्थली के लिए विशेष रियायतें प्रदान की गई हैं।

इन नियमों में सार्वजनिक रूप से सुलभ डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से सभी एसजेटी भूमि का व्यापक जीआईएस-आधारित डिजिटल मानचित्रण और सूची तैयार करना भी अनिवार्य है, जो वास्तविक समय में अद्यतन करने के लिए राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के भूलेख/भुनक्षा पोर्टल के साथ एकीकृत होगा।

धोखाधड़ी, गलतबयानी या मनगढ़ंत दस्तावेजों के माध्यम से प्राप्त कोई भी समझौता एसजेटीएमसी द्वारा रद्द किया जा सकता है, और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ दीवानी और आपराधिक कार्यवाही शुरू की जा सकती है।

पीड़ित पक्षों की अपीलों की सुनवाई के लिए सरकार के विधि विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय अपील समिति का भी गठन किया गया है। ये नियम ओडिशा राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे और दो वर्ष की अवधि तक लागू रहेंगे।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम