भारत के नक्शेकदम पर चला नेपाल, पेट्रोलियम उत्पाद शुल्क में कटौती का ऐलान
काठमांडू, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। नेपाल की नई सरकार ने मंगलवार को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर कुछ टैक्स छूट देने का फैसला किया, ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम किया जा सके। यह ऐलान भारत सरकार के फैसले से मेल खाता है।
मंगलवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में पेट्रोल, डीजल और केरोसीन पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी और इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स में 50 फीसदी की छूट को मंजूरी दी गई, संघीय मामलों और सामान्य प्रशासन मंत्री प्रतिभा रावल ने पत्रकारों को बताया। उन्होंने कहा, "यह फैसला नेपाल गजट में प्रकाशित किया जाएगा।"
अभी, पेट्रोल पर 25.23 एनपीआर (नेपाली रुपया) प्रति लीटर कस्टम ड्यूटी लगती है, जबकि डीजल पर 12.02 एनपीआर प्रति लीटर टैक्स लगता है। इसके अलावा, दोनों फ्यूल पर 10 एनपीआर प्रति लीटर का इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स लगता है। इन दो टैक्स के अलावा, सरकार वैल्यू-एडेड टैक्स (वैट), रोड मेंटेनेंस टैक्स, प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड चार्ज, पॉल्यूशन टैक्स और ग्रीन टैक्स जैसे अतिरिक्त शुल्क लेवी भी लगाती है।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति पर रोक लगी हुई है। इस वजह से, इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। इससे परिवहन और बीमा का खर्च भी बढ़ गया है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन पर निर्भर सामान की कीमतें बढ़ गई हैं। एशियाई देश इस रुकावट से खास तौर पर प्रभावित हुए हैं, क्योंकि वे खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
नेपाल सीधे खाड़ी या दूसरे क्षेत्रों से पेट्रोलियम उत्पाद आयात नहीं करता है, बल्कि रिफाइंड फ्यूल के लिए पूरी तरह से भारत पर निर्भर है। हालांकि, भारत खुद ईंधन आयात में चुनौतियों का सामना कर रहा है। मार्च के आखिर में, भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपए प्रति लीटर कम कर दी, जिससे पेट्रोल के लिए यह 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल के लिए जीरो हो गई।
पिछले वित्त वर्ष में, नेपाल ने 288 बिलियन एनपीआर का पेट्रोलियम उत्पाद आयात किया था।
--आईएएनएस
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