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वीजा नियम उल्लंघन मामले में नेपाल की कार्रवाई, 88 चीनी नागरिकों को वापस भेजना शुरू किया

काठमांडू, 24 सितंबर (आईएएनएस)। नेपाल आव्रजन (इमिग्रेशन) विभाग ने कहा है कि उसने उन 88 चीनी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्होंने नेपाल का बिजनेस वीजा तो लिया था, लेकिन वे ऐसी गतिविधियों में शामिल थे जो नियम विरुद्ध थे।
 

काठमांडू, 24 सितंबर (आईएएनएस)। नेपाल आव्रजन (इमिग्रेशन) विभाग ने कहा है कि उसने उन 88 चीनी नागरिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्होंने नेपाल का बिजनेस वीजा तो लिया था, लेकिन वे ऐसी गतिविधियों में शामिल थे जो नियम विरुद्ध थे।

विभाग ने बुधवार शाम जारी एक प्रेस बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि ये लोग जियान फूड्स प्राइवेट लिमिटेड में काम कर रहे थे। यह कंपनी चेंगदू तियान फूड लिमिटेड की वित्तीय साझेदारी में सिंधुली जिले की मारिनी ग्रामीण नगर पालिका में 'चीन को नेपाल के हीट-प्रोसेस्ड भैंस के मांस के निर्यात' का प्रोजेक्ट विकसित कर रही है।

विभाग के अनुसार, इन 88 विदेशियों ने दूसरी कंपनियों के नाम पर बिजनेस वीजा लिया था, लेकिन वे जियान फूड्स प्राइवेट लिमिटेड में ऐसे काम में लिप्त पाए गए जो उनके वीजा के मकसद से मेल नहीं खाते थे।

इमिग्रेशन विभाग के प्रवक्ता टिकाराम ढकाल ने बताया कि इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन करते पाए गए सभी विदेशी चीनी नागरिक थे।

उन्होंने कहा, "उनके वीजा रद्द कर दिए गए हैं और हम उन्हें नेपाल से वापस भेजने की प्रक्रिया में हैं। उन्हें तीन साल तक नेपाल में प्रवेश करने से रोक दिया जाएगा।"

विभाग के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर हाल ही में की गई निगरानी के दौरान, बिजनेस वीजा धारक ऐसे कामों, मजदूरी और अन्य गतिविधियों में शामिल पाए गए जिनका उन व्यवसायों या निवेशों से कोई लेना-देना नहीं था, जिनके लिए उनके वीजा की सिफारिश और मंजूरी दी गई थी।

निगरानी के दौरान, चीनी निवेश वाले इस प्रोजेक्ट में 501 चीनी नागरिक पाए गए।

ढकाल ने कहा कि और भी चीनी नागरिकों को वापस भेजा जा सकता है, क्योंकि 501 में से 329 नागरिक टूरिस्ट वीजा पर नेपाल आए थे और इमिग्रेशन नियमों के संभावित उल्लंघन के लिए उनकी जांच की जा रही है।

ढकाल ने कहा, "हम उनके यात्रा इतिहास, रुकने की अवधि और गतिविधियों की जांच और स्क्रीनिंग कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वे टूरिस्ट वीजा पर रहते हुए वहां काम कर रहे थे। जांच पूरी होने के बाद अगले चरण में जरूरी कार्रवाई की जाएगी।"

ढकाल के अनुसार, सिंधुली के जिला प्रशासन कार्यालय ने सबसे पहले अधिकारियों को सूचित किया था कि मांस-प्रोसेसिंग उद्योग में बड़ी संख्या में चीनी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं।

ढकाल ने कहा, "इनमें से 88 लोगों ने अन्य व्यावसायिक उद्देश्यों, जैसे रेस्तरां या सॉफ्टवेयर कंपनियां खोलने के बहाने बिजनेस वीजा प्राप्त किया, लेकिन वे अपने वीजा के मकसद का उल्लंघन करते हुए मांस-प्रोसेसिंग उद्योग में काम करते और रहते हुए पाए गए। ऐसी शिकायतें भी थीं कि वे ऐसी गतिविधियों में शामिल थे जिनसे स्थानीय पर्यावरण और संस्कृति पर असर पड़ रहा था।"

नेपाल के इमिग्रेशन नियमों के तहत, उन विदेशी नागरिकों को बिजनेस वीजा दिया जाता है जिनके पास देश में कमर्शियल या इंडस्ट्रियल बिजनेस में निवेश करने का लाइसेंस है, या जो ऐसी संस्थाओं के अधिकृत प्रतिनिधि हैं और संबंधित अधिकारियों ने उनकी सिफारिश की है। उन विदेशियों को भी बिजनेस वीजा जारी किया जाता है जो एक्सपोर्ट के लिए नेपाल में बने सामान खरीदते हैं।

इमिग्रेशन नियम, 1994 के अनुसार, बिजनेस वीजा रखने वाले विदेशी नागरिकों को नेपाल में उसी मकसद के लिए रहना होता है जिसके लिए उनका वीजा जारी किया गया था। इसके अलावा नौकरी, मजदूरी या किसी और गैर-संबंधित काम के लिए वीजा का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

इमिग्रेशन विभाग ने सभी विदेशी नागरिकों से अपील की है कि वे केवल अपने वीजा के मकसद और शर्तों के तहत ही काम करें। विभाग ने उद्योगों, कंपनियों, प्रतिष्ठानों और नियोक्ताओं से यह भी कहा है कि वे उचित और आवश्यक मंजूरी के बिना विदेशी नागरिकों को काम पर न रखें।

ढाकल ने कहा, "हमने कंपनी को भी चेतावनी दी है। चूंकि यह अपनी तरह की पहली घटना है, इसलिए कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए, इस पर बातचीत चल रही है, जिसमें चेतावनी या निर्देश जारी करना भी शामिल है।"

इमिग्रेशन विभाग के डेटा के अनुसार, नेपाल ने 2021 से 2025 के बीच पांच साल में देश के इमिग्रेशन कानूनों का उल्लंघन करने वाले सबसे ज्यादा चीनी नागरिकों को डिपोर्ट किया।

विभाग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया कि इस दौरान नेपाल ने 695 चीनी नागरिकों को डिपोर्ट किया, जो देश से डिपोर्ट किए गए विदेशी नागरिकों में सबसे बड़ा हिस्सा था। नेपाल ने इन पांच साल में कुल 2,267 विदेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया, जिनमें चीनी नागरिकों की हिस्सेदारी कुल संख्या का 30.65 प्रतिशत थी।

--आईएएनएस

केआर/