एनसीपी-एसपी के फहद अहमद ने सनातन विरोधी टिप्पणी के लिए उदयनिधि स्टालिन की आलोचना की
मुंबई, 12 मई (आईएएनएस)। एनसीपी (एसपी) नेता फहद अहमद ने मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की उनके 'सनातन विरोधी' बयान को लेकर आलोचना की और इस बयान को 'बचकाना और अनुचित' बताया।
दरअसल, तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया, जब उन्होंने नए चुने गए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की मौजूदगी में सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही।
आईएएनएस से बात करते हुए अहमद ने कहा, "यह बहुत ही बचकाना बयान है। किसी भी धर्म के बारे में ऐसी टिप्पणी करना, मुझे लगता है, उदयनिधि स्टालिन की तरफ से पूरी तरह से गलत और अपरिपक्व है।" उन्होंने इस बयान को 'शर्मनाक' भी बताया।
एनसीपी-एसपी नेता ने डीएमके के साथ अपना गठबंधन तोड़ने के लिए कांग्रेस को बधाई दी।
कांग्रेस ने डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होकर विजय के नेतृत्व वाली टीवीके को समर्थन दिया, ताकि टीवीके तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा छू सके।
अहमद ने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस 'इंडिया' ब्लॉक में एनसीपी-एसपी की सहयोगी है, और डीएमके के ऐसे बयानों की वजह से कांग्रेस को भी 'असहज स्थितियों' का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा, "हमारा संविधान हर धर्म को अपने रीति-रिवाजों का पालन करने की आजादी देता है, और इसके अलावा, देश की ज्यादातर आबादी हिंदू धर्म को मानती है।"
उन्होंने कहा कि अगर कोई 'समाज सुधारक' बनना चाहता है और उसे लगता है कि हिंदू धर्म में कोई दिक्कतें हैं, तो उसे 'समाज सुधार' के जरिए ही काम करना चाहिए।
इसी तरह, अहमद ने कहा कि अगर किसी को लगता है कि मुस्लिम धर्म में कोई दिक्कतें हैं, तो वहां भी 'समाज सुधार' का रास्ता अपनाया जा सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा, "किसी भी धर्म की इस तरह बार-बार आलोचना नहीं की जा सकती।"
एनसीपी-एसपी नेता ने फिर दोहराया कि उदयनिधि स्टालिन का बयान 'बेहद बचकाना' है और ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, "तमिलनाडु के लोग बहुत पढ़े-लिखे हैं; उन्हें भी अपने नेता प्रतिपक्ष से ऐसी टिप्पणियों की उम्मीद नहीं होगी।"
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता नाजिया इलाही खान ने कहा, "तमिलनाडु की जनता ने विजय को अपना जनादेश देकर (डीएमके को) जवाब दे दिया है। अगर उन्हें (डीएमके को) अब भी यह बात समझ नहीं आती, तो मुझे लगता है कि पूरी तरह से खत्म होने के बाद ही उन्हें यह बात समझ आएगी।"
उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक लड़ाई, राजनीतिक द्वेष और यहां तक कि राजनीतिक बदला लेना भी ठीक है, लेकिन 'भगवान राम से लड़ना ठीक नहीं है। इसे भगवान राम और उनके भक्त, दोनों ही स्वीकार नहीं करेंगे। आप राजनीतिक दल से लड़िए, सनातन से मत लड़िए।"
--आईएएनएस
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