मणिपुर में नागा गांव के रक्षक की गोली मारकर हत्या, मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के आदेश दिए
इंफाल, 8 जून (आईएएनएस)। मणिपुर के कांगपोकपी जिले में सोमवार को नागा समुदाय के एक 58 वर्षीय व्यक्ति की जंगल में गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह कुछ घंटे पहले ही जलाऊ लकड़ी लेने जंगल गए थे।
पुलिस अधिकारी ने मृतक की पहचान चुंजंगलुंग पानमेई के रूप में की, जो उसी इलाके के निवासी थे और ग्राम रक्षक के रूप में भी कार्यरत थे।
उनकी हत्या पहाड़ी कांगपोकपी जिले के जंगल में हुई।
अधिकारियों के अनुसार, पानमेई घरेलू उपयोग के लिए जलाऊ लकड़ी लेने जंगल गए थे, तभी यह घटना घटी।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि इलाके से गोलियों की आवाज सुनकर आसपास की बस्तियों के ग्रामीण सुरक्षाकर्मियों के साथ पानमेई की तलाश में जंगल पहुंचे।
बाद में उनका शव जंगल से बरामद किया गया, जिसमें सिर में गोली लगने सहित कई गोलियों के निशान थे।
यह गांव लोइबोल खुल्लेन के पास स्थित है, जहां 5 जून को अज्ञात बंदूकधारियों ने एक महिला सहित तीन नागरिकों की हत्या कर दी थी, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
इस बीच, नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (एनपीओ) ने दावा किया कि पानमेई एक स्वयंसेवी ग्राम रक्षक के रूप में सेवा कर रहे थे और इस हत्या को 'निर्दयी हत्या' बताया।
एक बयान में, एनपीओ ने आरोप लगाया कि पानमेई को किसी भी गलत काम के लिए निशाना नहीं बनाया गया था, बल्कि केवल उनकी नागा पहचान के कारण उनकी हत्या कर दी गई थी।
संगठन ने संबंधित अधिकारियों से घटना की तत्काल गहन और समयबद्ध जांच शुरू करने और दोषियों की पहचान करके उन्हें न्याय के कटघरे में लाने का आग्रह किया।
एक अन्य स्थानीय नागा संगठन, पोंगरिंगलोंग यूथ क्लब, ने भी इस हत्या की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की।
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने चुंजांगलुंग पानमेई की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त किया और इस घटना की कड़ी निंदा की।
मुख्यमंत्री ने एक बयान में इस हत्या को एक निर्दोष नागरिक के खिलाफ जघन्य और कायरतापूर्ण हिंसा का कृत्य बताया। उन्होंने कहा कि मणिपुर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) दोषियों को ढूंढने और उन्हें कानून के दायरे में लाने के लिए अभियान चला रहे हैं।
--आईएएनएस
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