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हिमाचल के लाहौल-स्पीति को बड़ी सौगात, केलोंग में हाई-एल्टीट्यूड हेल्थ रिसर्च सेंटर का शिलान्यास करेंगे जेपी नड्डा

शिमला, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा सोमवार को हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के केलोंग में आईसीएमआर सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च (आईसीएमआर-सीएचएएमपी) की आधारशिला रखेंगे।
 

शिमला, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा सोमवार को हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के केलोंग में आईसीएमआर सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च (आईसीएमआर-सीएचएएमपी) की आधारशिला रखेंगे।

यह सेंटर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के तहत स्थापित किया जा रहा है। इसका मकसद भारत के ज्यादा ऊंचाई वाले और जलवायु के प्रति संवेदनशील इलाकों पर केंद्रित मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च, इनोवेशन और क्षमता निर्माण को मजबूत करना है।

हिमालयी इकोसिस्टम में ज्यादा ऊंचाई, बहुत ज्यादा खराब मौसम, मुश्किल इलाके, भौगोलिक अलगाव और जलवायु में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी खास चुनौतियां पैदा होती हैं।

ये कारक बीमारियों के पैटर्न, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, काम से जुड़ी सेहत और आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया पर असर डालते हैं।

यह सेंटर वैज्ञानिक सबूत जुटाने और इन मुश्किल हालात में रहने और काम करने वाले लोगों के लिए खास तौर पर तैयार किए जा सकने वाले और बड़े पैमाने पर लागू किए जा सकने वाले हेल्थकेयर समाधान विकसित करने के काम को मजबूत करेगा।

सेंटर के रिसर्च के दायरे में ज्यादा ऊंचाई पर शरीर की कार्यप्रणाली और वहां के माहौल में ढलने की प्रक्रिया, पर्वतीय चिकित्सा, जलवायु-संवेदनशील और नई उभरती बीमारियां, संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियां, मां और बच्चे की सेहत, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण और काम से जुड़ी सेहत, और आपदा चिकित्सा जैसे विषय शामिल होंगे।

यह दूर-दराज और मुश्किल से पहुंचने वाले इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर बनाने के लिए डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, टेलीमेडिसिन, ड्रोन-आधारित हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स और रियल-टाइम पब्लिक हेल्थ सर्विलांस को एक साथ लाने की संभावनाओं पर भी काम करेगा।

यह सेंटर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाके में ज्यादा ऊंचाई वाले और आदिवासी समुदायों के साथ लगातार फील्ड रिसर्च करने के लिए एक अहम संस्थागत मंच प्रदान करेगा।

इसकी लोकेशन से पर्यावरण की स्थितियों, जलवायु में बदलाव और स्वास्थ्य परिणामों के बीच संबंध पर लंबे समय तक चलने वाले अध्ययन और जांच में मदद मिलेगी।

उम्मीद है कि यह सेंटर आदिवासी स्वास्थ्य, आपदा की तैयारी, डिजिटल हेल्थ इनोवेशन और जलवायु-अनुकूल स्वास्थ्य प्रणालियों के विकास जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में योगदान देगा, साथ ही ज्यादा ऊंचाई वाली चिकित्सा से जुड़ी वैश्विक रिसर्च में भारत के योगदान को भी मजबूत करेगा।

इस समारोह में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत समेत अन्य लोग शामिल होंगे।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी