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'असंभव' को संभव करना ही महायुति सरकार का मूलमंत्र है: एकनाथ शिंदे

पुणे, 1 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को महा विकास अघाड़ी (एमवीए) पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि वे महाराष्ट्र की प्रगति की कड़ी से चूक गए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान महायुति सरकार ने न केवल उस कड़ी को बहाल किया है, बल्कि राज्य के भविष्य के लिए एक हाई-स्पीड कॉरिडोर भी प्रदान किया है।
 
'असंभव' को संभव करना ही महायुति सरकार का मूलमंत्र है: एकनाथ शिंदे

पुणे, 1 मई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को महा विकास अघाड़ी (एमवीए) पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि वे महाराष्ट्र की प्रगति की कड़ी से चूक गए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान महायुति सरकार ने न केवल उस कड़ी को बहाल किया है, बल्कि राज्य के भविष्य के लिए एक हाई-स्पीड कॉरिडोर भी प्रदान किया है।

वे एक्सप्रेसवे पर मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक परियोजना के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। यह परियोजना घाट खंडों में लंबे समय से चली आ रही यातायात की भीड़ को खत्म करने और तेज और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

पिछली सरकार के 'वर्क फ्रॉम होम' कल्चर पर कटाक्ष करते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने आरोप लगाया कि एमवीए द्वारा इस परियोजना को दरकिनार कर दिया गया था या रद्द करने पर भी विचार किया गया था।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने कहा कि यह परियोजना असंभव है और इसे रद्द करने की कोशिश की। लेकिन 'असंभव' को संभव करना ही महायुति सरकार का मूलमंत्र है। उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि वे (एमएसआरडीसी मंत्री के रूप में) भूमि पूजन और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उद्घाटन समारोह में उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए शिंदे ने एक्सप्रेसवे के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि यह बालासाहेब ठाकरे का सपना था और नितिन गडकरी ने इसे साकार किया।

हालांकि, खंडाला घाट पर ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रही। शिंदे ने कहा कि घाट पर ट्रैफिक जाम के कारण यात्रियों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ती है। अगर ट्रैफिक जाम दर्द था, तो यह 'मिसिंग लिंक' परियोजना एक स्थायी और कारगर इलाज है।

उन्होंने कहा कि लगभग 7,000 करोड़ रुपए की लागत से पूरी हुई इस परियोजना से निवेश से कहीं अधिक आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय 30 से 40 मिनट कम हो जाएगा। इसमें टाइगर वैली में बना 182 मीटर ऊंचा एक पुल शामिल है, जो भारत का सबसे ऊंचा पुल है और अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। इस परियोजना से ईंधन दक्षता में वृद्धि होगी, और अनुमान है कि प्रतिदिन ईंधन लागत में 1 करोड़ रुपए से अधिक की बचत होगी।

--आईएएनएस

एमएस/