मध्य प्रदेश: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल मामले की जांच के लिए गठित की गई समिति
इंदौर, 20 जनवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को इंदौर के भागीरथपुरा में पानी में गंदगी की घटना की जांच के लिए एक राज्य स्तरीय समिति बनाई है। इस घटना में कई लोगों की मौत हो गई है और लगभग 500 लोग पानी से होने वाली बीमारियों से प्रभावित हुए हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में गठित समिति को पानी दूषित होने के पीछे के वास्तविक कारणों और इससे जुड़े अहम तथ्यों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है।
इस समिति में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि और शहरी प्रशासन एवं विकास निदेशालय के आयुक्त संकेत भोड़ावे भी शामिल हैं। इंदौर संभागायुक्त सुदाम खाड़े को समिति का सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया है।
इंदौर जिला प्रशासन के अनुसार, यह समिति घटना के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक, तकनीकी और प्रबंधन से जुड़ी कमियों का विश्लेषण करेगी।
इसके साथ ही समिति दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करेगी, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सिफारिशें देगी और जांच से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी विचार करेगी।
समिति को संबंधित विभागों से रिकॉर्ड, रिपोर्ट और जानकारी प्राप्त करने तथा आवश्यकता पड़ने पर मौके पर जाकर निरीक्षण करने का अधिकार दिया गया है। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी।
अधिकारियों के मुताबिक, भागीरथपुरा इलाके में स्वास्थ्य स्थिति में काफी सुधार हुआ है और क्षेत्र के 30 प्रतिशत हिस्से में पानी की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी गई है। हालांकि, लोग अब भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं।
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि अभी 17 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से सात आईसीयू में इलाजरत हैं।
यह दूषित पानी की घटना दिसंबर के अंतिम सप्ताह में सामने आई थी, जिससे भागीरथपुरा में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया था।
डायरिया से पीड़ित कुल 450 लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जिनमें से मंगलवार शाम तक 433 मरीजों को छुट्टी दे दी गई।
--आईएएनएस
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