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मध्य प्रदेश सरकार ने सिताही-नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर की फसल के लिए जीआई टैग मांगा

भोपाल, 28 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार ने शनिवार को बताया कि तीन फसलों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर के लिए ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग का प्रस्ताव चेन्नई में ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री को जांच के लिए भेजा है।
 
मध्य प्रदेश सरकार ने सिताही-नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर की फसल के लिए जीआई टैग मांगा

भोपाल, 28 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार ने शनिवार को बताया कि तीन फसलों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर के लिए ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग का प्रस्ताव चेन्नई में ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री को जांच के लिए भेजा है।

मध्य प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में मुख्य रूप से उगाई जाने वाली इन विशिष्ट और पारंपरिक फसलों के लिए जीआई टैग प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर की ओर से तैयार किए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य सिताही कुटकी को राष्ट्रीय स्तर पर एक मान्यता प्राप्त ब्रांड के रूप में स्थापित करना है, जिससे नए बाजार अवसर खुलेंगे। इससे इस किस्म के बाजरे की खेती करने वाले आदिवासी किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

सरकार ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में किसानों को कोदो और कुटकी जैसी पारंपरिक फसलों के संरक्षण और खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, क्योंकि अब ये आर्थिक रूप से लाभदायक फसलें बन गई हैं।

राज्य सरकार रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों से कोदो और कुटकी बाजरा 1,000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीद रही है। जबलपुर, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और रीवा सहित 16 जिलों के 22,000 से अधिक किसान भाग ले रहे हैं।

गौरतलब है कि सिताही कुटकी बाजरे की एक स्वदेशी किस्म है, जिसकी वृद्धि अवधि मात्र 60 दिन होती है।

यह वर्षा आधारित क्षेत्रों और देर से बुवाई की परिस्थितियों में खेती के लिए उपयुक्त है। इसे पहाड़ी, ऊबड़-खाबड़ और कम उपजाऊ मिट्टी वाले इलाकों में भी उगाया जा सकता है। इसमें दिंडोरी की बैगा और गोंड जनजातियों के किसानों के लिए पर्याप्त आय उत्पन्न करने की क्षमता है।

इसी प्रकार, नागदमन कुटकी बाजरे की एक विशिष्ट स्थानीय किस्म है जिसकी खेती विशेष रूप से दिंडोरी और अन्य आदिवासी बहुल जिलों में की जाती है। यह अपने औषधीय गुणों और असाधारण पोषण मूल्य के लिए प्रसिद्ध है।

सरकार ने कहा कि जीआई टैग के माध्यम से मान्यता इस बात का आधिकारिक प्रमाण होगी कि फसल स्थापित गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करती है।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी