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मोस्ट-वांटेड माओवादी दंपती ने कोलकाता पुलिस प्रमुख के सामने आत्मसमर्पण किया

कोलकाता, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्य झारखंड में वांछित माओवादी दंपती मंगल और मालती ने शुक्रवार को लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त अजय के. नंद के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
 

कोलकाता, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्य झारखंड में वांछित माओवादी दंपती मंगल और मालती ने शुक्रवार को लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त अजय के. नंद के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

आत्मसमर्पण के दौरान, उन्होंने पुलिस को एक एके-47 और एक इंसास राइफल भी सौंपी।

पुलिस के अनुसार, मंगल और मालती दोनों पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। मंगल पश्चिम मेदिनीपुर के सालबोनी से है, जबकि मालती झारग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर से है।

हालांकि, उनकी माओवादी गतिविधियां मुख्य रूप से झारखंड तक ही सीमित थी और वे कभी-कभार ही पश्चिम बंगाल आते थे।

मंगल सबसे पहले झारखंड के दलमा इलाके में और बाद में सारंडा इलाके में माओवादी गतिविधियों में शामिल हुआ। मालती, मंगल के बाद वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी और शुरुआत से ही उसकी भूमिका मुख्य रूप से झारखंड तक ही सीमित रही।

पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के कारण माओवादियों ने इस साल की शुरुआत में झारखंड के सारंडा वन क्षेत्र को छोड़ना शुरू कर दिया था। वहां उनके लिए काम करना मुश्किल हो गया था।

सुरक्षा बलों की सूची में पश्चिम बंगाल के लगभग 13 माओवादी थे, जिन्हें समय-समय पर गिरफ्तार कर लिया गया।

हाल ही में झारखंड में तीन माओवादियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक वांछित माओवादी नेता पुष्पा ने कुछ महीने पहले कोलकाता में आत्मसमर्पण कर दिया था। अब, मंगल और मालती ने भी कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

अधिकारियों ने मंगल पर 5 लाख रुपए और मालती पर 2 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।

आत्मसमर्पण के बाद मीडिया से बात करते हुए, कोलकाता पुलिस प्रमुख अजय के. नंद ने बताया कि मंगल 2010 के आसपास माओवादी आंदोलन से जुड़ा था और 2011-12 के बाद झारखंड चला गया था। वह दिवंगत माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ ​​किशनजी का करीबी माना जाता था, जो नवंबर 2011 में एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

आत्मसमर्पण के अपने फैसले के बारे में बताते हुए मंगल ने कहा कि उसे एहसास हो गया था कि सशस्त्र संघर्ष से सामाजिक बदलाव नहीं लाया जा सकता। उसने कहा कि हम दोनों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इसीलिए हम यहां आए और आत्मसमर्पण कर दिया।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम