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मिजोरम: नई रेल लाइन के उद्घाटन के बाद सैरांग रेलवे स्टेशन से 22,500 से अधिक आईएलपी जारी

आइजोल, 9 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई बैराबी-सैरांग रेल लाइन के उद्घाटन के बाद मिजोरम सरकार के सैरांग रेलवे स्टेशन कार्यालय से अब तक 22,500 से अधिक इनर लाइन परमिट (आईएलपी) जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
 
मिजोरम: नई रेल लाइन के उद्घाटन के बाद सैरांग रेलवे स्टेशन से 22,500 से अधिक आईएलपी जारी

आइजोल, 9 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई बैराबी-सैरांग रेल लाइन के उद्घाटन के बाद मिजोरम सरकार के सैरांग रेलवे स्टेशन कार्यालय से अब तक 22,500 से अधिक इनर लाइन परमिट (आईएलपी) जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

आईएलपी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है, जिसे भारतीय नागरिकों और गैर-स्थानीय लोगों को पूर्वोत्तर के संरक्षित क्षेत्रों, जिनमें मिजोरम भी शामिल है, में प्रवेश के लिए जारी किया जाता है।

मिजोरम गृह विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, 13 सितंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 के बीच सैरांग रेलवे स्टेशन स्थित आधिकारिक काउंटर से पर्यटकों, पेशेवरों, व्यापारियों, प्रवासी श्रमिकों और अन्य श्रेणियों के आगंतुकों को 22,500 से अधिक आईएलपी जारी किए गए हैं।

प्रधानमंत्री द्वारा 13 सितंबर को 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी (दक्षिणी असम के पास)–सैरांग (आइजोल के पास) रेल खंड का उद्घाटन किए जाने के बाद गृह विभाग ने सैरांग रेलवे स्टेशन पर आईएलपी काउंटर स्थापित किया था।

उसी दिन प्रधानमंत्री ने आइजोल को नई दिल्ली से जोड़ने वाली राजधानी एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई थी। इसके अलावा, आइजोल को कोलकाता और गुवाहाटी से जोड़ने वाली दो अन्य ट्रेनों का भी शुभारंभ किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, प्रतिदिन औसतन लगभग 400 नए आईएलपी जारी किए जा रहे हैं, क्योंकि सैरांग रेलवे स्टेशन पर रोजाना आमतौर पर दो यात्री ट्रेनें पहुंचती हैं।

अधिकांश आगंतुक दिल्ली, पश्चिम बंगाल और दक्षिणी राज्यों से आ रहे हैं, जबकि सबसे ज्यादा संख्या पड़ोसी असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से आने वालों की है।

हालांकि, अधिकारी ने यह भी बताया कि सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) और आईएलपी काउंटर में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखने, आईएलपी जारी करने और परमिट सत्यापन में गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं।

आईएलपी प्रणाली का उद्देश्य स्थानीय और आदिवासी लोगों की पहचान और अस्तित्व की रक्षा करना है। वर्तमान में यह व्यवस्था मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर में लागू है। कई संगठनों द्वारा मेघालय और त्रिपुरा में भी आईएलपी लागू करने की मांग की जा रही है।

आईएलपी व्यवस्था बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत संचालित होती है, जिसे 1875 में ब्रिटिश सरकार ने अधिसूचित किया था। इसके तहत भारतीय नागरिकों को सीमित अवधि और विशेष उद्देश्य के लिए आईएलपी लागू राज्यों में प्रवेश की अनुमति दी जाती है।

मिजोरम की यात्रा के लिए आईएलपी आइजोल के लेंगपुई हवाई अड्डे के अलावा शिलांग, गुवाहाटी, सिलचर, कोलकाता और नई दिल्ली स्थित मिजोरम सरकार के काउंटरों से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

--आईएएनएस

डीएससी