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दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं है तो 25 नवंबर तक भरें फॉर्म-6, 22 दिसंबर को जारी होगी अंतिम सूची

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में जिन लोगों का नाम शामिल नहीं है, वे 25 नवंबर 2026 तक फॉर्म-6 भरकर अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को दिल्ली के सभी निवासियों से अपील की कि वे 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम जांच लें।
 

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में जिन लोगों का नाम शामिल नहीं है, वे 25 नवंबर 2026 तक फॉर्म-6 भरकर अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को दिल्ली के सभी निवासियों से अपील की कि वे 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम जांच लें।

आयोग ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 25 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑफलाइन आवेदन के लिए मतदाता निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ), बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) और निर्धारित मतदान केंद्रों पर अपने दावे और आपत्तियां जमा कर सकते हैं।

वहीं, ऑनलाइन आवेदन के लिए आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल या मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है। आयोग की ओर से 4 नवंबर तक जारी आंकड़ों के मुताबिक, नो-मैपिंग और लॉजिकल विसंगतियों की दो श्रेणियों में पहचाने गए कुल 33,14,032 मतदाताओं में से 13,05,630 मामले नो-मैपिंग श्रेणी और 19,29,582 मामले लॉजिकल विसंगति श्रेणी के अंतिम मतदाता सूची के लिए अलग रखे गए हैं।

ईसीआई ने बताया कि इन आंकड़ों में 13,79,789 नो-मैपिंग मामलों और 19,34,243 लॉजिकल विसंगति वाले मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस भी शामिल हैं। इस बीच, निर्वाचन आयोग ने उन मतदाताओं की चिंताओं को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है, जिनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं है।

आयोग के अनुसार, कुछ मतदाता फॉर्म-6 भरने से इसलिए हिचकिचा रहे थे, क्योंकि इस फॉर्म में निर्धारित घोषणा के तहत यह बताना होता है कि उनका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है। ऐसे मतदाताओं को आशंका थी कि पहले से पंजीकृत होने के बावजूद यह घोषणा करने पर उनके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत गलत घोषणा करने के लिए कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इस संबंध में 3 नवंबर 2026 को जारी पत्र में आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाताओं की यह आशंका निराधार है। फॉर्म-6 में यह घोषणा 1 अगस्त 2022 से ही शामिल है और जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उन्हें पहले पंजीकृत होने के बावजूद दोबारा नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना होगा।

आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर 2026 के नीलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। इस फैसले में अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार विचार के लिए फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।

निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद पहले से पंजीकृत किसी मतदाता के फॉर्म-6 जमा करने मात्र से उसके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि संबंधित मतदाता का नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज न हो और उसकी घोषणा कानून के अनुरूप हो।

--आईएएनएस

डीएससी