मीरवाइज उमर फारूक बोले- अधिकारियों ने उन्हें धार्मिक सभा को संबोधित करने से रोका
श्रीनगर, 17 अगस्त (आईएएनएस)। वरिष्ठ धार्मिक नेता और मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने सोमवार को अधिकारियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें नजरबंद करके श्रीनगर में एक धार्मिक सभा को संबोधित करने से रोका।
मीरवाइज उमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि उन्हें नक्शबंद साहब में 'ख्वाजा दिगर' की पारंपरिक धार्मिक सभा को संबोधित करने की अनुमति नहीं दी गई। यह सभा हर साल रबी-उल-अव्वल के तीसरे दिन आयोजित की जाती है। उन्होंने दावा किया कि हजारों लोग इस सभा में शामिल होने के लिए इंतजार कर रहे थे।
उन्होंने लिखा कि मेरे राजनीतिक नजरिए और लोगों की सामाजिक व धार्मिक चिंताओं को उठाने की सजा के तौर पर मीरवाइज के तौर पर मुझे सामूहिक धार्मिक आयोजनों को संबोधित करने से रोकना शासकों की जानी-पहचानी दमनकारी सोच को तो दिखाता ही है, साथ ही यह दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों के प्रति 'संवेदनहीनता और अनादर' दिखा रहे हैं, क्योंकि वे उन्हें उपदेश सुनने और आध्यात्मिक अनुभवों में शामिल होने के अधिकार से वंचित कर रहे हैं।
उन्होंने चुनी हुई सरकारों से घाटी और जम्मू में मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया।
पिछले हफ्ते शुक्रवार को भी मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंद कर दिया गया था और उन्हें श्रीनगर के नवाहट्टा स्थित जामा मस्जिद में पारंपरिक शुक्रवार का उपदेश देने की अनुमति नहीं दी गई थी।
अधिकारियों का कहना है कि मीरवाइज उमर फारूक को कभी-कभी उनकी निजी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नजरबंद किया जाता है।
मीरवाइज उमर फारूक 'अवामी एक्शन कमेटी' (एएसी) के प्रमुख भी हैं, जिसे गृह मंत्रालय (एमएचए) ने प्रतिबंधित संगठन घोषित किया है।
गृह मंत्रालय ने 11 मार्च, 2025 को 'गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' (यूएपीए) के तहत जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया।
--आईएएनएस
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