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केरल: मंत्री ओजे जनीश ने एलडीएफ सरकार के 'मेसी एपिसोड' पर कहा-सवालों के अब तक नहीं मिले जवाब

तिरुवनंतपुरम, 12 अगस्त (आईएएनएस)। केरल के खेल मंत्री ओ.जे. जनीश ने बुधवार को संकेत दिया कि मेसी से जुड़े विवादित मामले में अभी और भी कई मोड़ आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस नाकाम प्रोजेक्ट से जुड़े हालात की जांच कर रही है और अभी कई बातें सामने आनी बाकी हैं।
 

तिरुवनंतपुरम, 12 अगस्त (आईएएनएस)। केरल के खेल मंत्री ओ.जे. जनीश ने बुधवार को संकेत दिया कि मेसी से जुड़े विवादित मामले में अभी और भी कई मोड़ आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस नाकाम प्रोजेक्ट से जुड़े हालात की जांच कर रही है और अभी कई बातें सामने आनी बाकी हैं।

नए दस्तावेजों से स्पॉन्सर चुनने और समझौते में तत्कालीन सरकार की भूमिका पर सवाल उठने के बाद गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस मामले की और बारीकी से जांच होने की संभावना है।

जेनीश ने मीडिया से कहा, "अभी बहुत सी बातें सामने आनी बाकी हैं।" उन्होंने यह साफ कर दिया कि सरकार अभी इस विवाद को खत्म करने के मूड में नहीं है।

उन्होंने स्पॉन्सर चुनने में पारदर्शिता की कमी की ओर भी इशारा किया और सवाल उठाया कि लियोनेल मेसी के प्रस्तावित केरल दौरे से जुड़े प्रोजेक्ट में कोई प्राइवेट कंपनी कैसे शामिल हो गई।

पूर्व खेल मंत्री वी. अब्दुर रहमान द्वारा 18 अक्टूबर 2025 को एएफए को भेजे गए एक ईमेल के सामने आने से इस विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस ईमेल में उन्होंने स्पॉन्सर का पुरजोर बचाव किया है और समझौते को रद्द करने का विरोध किया है।

अब्दुर रहमान ने तर्क दिया कि एएफए-आरबीसी व्यवस्था केवल एक व्यावसायिक अनुबंध नहीं थी बल्कि केरल सरकार द्वारा समर्थित एक आश्वासन थी।

पूर्व मंत्री ने अपने संदेश में कहा, “एएफए-आरबीसी सिर्फ एक कमर्शियल समझौता नहीं है। यह सरकार की पहल पर दिया गया एक भरोसा है। 1.3 अरब लोगों ने केरल सरकार पर भरोसा किया।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस समझौते में पूरे देश का भरोसा शामिल है। इस ईमेल से यह भी पता चलता है कि सरकार इस डील के लिए कितनी प्रतिबद्ध थी, जबकि अब इस प्रोजेक्ट के ढांचे पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं।

मंगलवार को सतीशन सरकार को खेल विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी की ओर से सौंपी गई एक रिपोर्ट ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। खबरों के मुताबिक, इसमें इस प्रोजेक्ट को एक ऐसे अनोखे ढांचे वाला बताया गया है, जिसने एक प्राइवेट कंपनी को सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल करके मुनाफा कमाने का मौका दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी टीवी न्यूज चैनल को चुनने के बारे में सरकार के स्पष्ट आदेश नहीं थे और यह भी बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट पर कुल 126 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें विदेशी मुद्रा का लेनदेन भी शामिल था।

सरकार गुरुवार को इस पर फैसला लेगी और पूरी संभावना है कि कथित भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन की उच्च-स्तरीय जांच कराई जाएगी।

गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इन नतीजों पर बारीकी से विचार करने और आगे की राह तय करने की उम्मीद है। इससे 'मेसी प्रोजेक्ट' को कैसे सोचा गया, मंजूरी दी गई और लागू किया गया। इस बारे में एक बड़ी जांच शुरू हो सकती है।

--आईएएनएस

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