महबूबा मुफ्ती 5वीं बार पीडीपी अध्यक्ष चुनी गईं, कहा- मेरा दिल भारी भी है और भरा हुआ भी...
श्रीनगर, 5 नवंबर (आईएएनएस)। महबूबा मुफ्ती को गुरुवार को पांचवीं बार पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) का अध्यक्ष फिर से चुन लिया गया। महबूबा मुफ्ती 2003 से पीडीपी का नेतृत्व कर रही हैं।
पार्टी की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पीडीपी के इलेक्टोरल कॉलेज ने जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को सर्वसम्मति से फिर से पीडीपी अध्यक्ष चुन लिया है। बयान में कहा गया है कि उनके पक्ष में पड़े सर्वसम्मत वोटों से यह जाहिर होता है कि उन्होंने पार्टी को उससे कहीं ज्यादा दिया है, जितना उन्हें पार्टी से मिला है।
बयान के मुताबिक, उन्हें फिर से चुनने का प्रस्ताव पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने रखा, जिसका वरिष्ठ नेता मोहम्मद खुर्शीद आलम ने समर्थन किया।
पीडीपी ने बताया कि बैठक में मौजूद इलेक्टोरल कॉलेज के सभी सदस्यों ने उनकी उम्मीदवारी का सर्वसम्मति से समर्थन किया, जो एक सामूहिक फैसले को दर्शाता है।
पार्टी ने आगे कहा कि जम्मू से आए इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्यों ने ऑनलाइन प्रक्रिया में हिस्सा लिया और उनके फिर से चुने जाने का समर्थन किया।
फिर से चुने जाने के बाद, महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जो लोग सालों से तकलीफ झेल रहे हैं, उन्हें राजनीतिक जीत की नहीं, बल्कि मरहम (राहत) की जरूरत है।
उन्होंने कहा, "जो लोग आहत हैं, उन्हें जीत नहीं चाहिए। उन्हें मरहम चाहिए। मेरा दिल भारी भी है और भरा हुआ भी। मैं आभारी हूं। आपने पांचवीं बार मुझ पर भरोसा जताया है, और मैं इसे हल्के में नहीं लेती।"
उन्होंने कहा, "मैं उन लोगों का दर्द भी महसूस करती हूं, जिन्होंने बहुत कुछ दिया है, पर जिनकी बात बहुत कम सुनी गई है।"
उन्होंने युवाओं के बीच अनिश्चितता का जिक्र करते हुए कहा कि वे उनके इस सवाल को सुन और महसूस कर सकती हैं कि 'क्या आने वाला कल बीते हुए कल से अलग होगा?'
उन्होंने कहा, "यह वही पार्टी है जिसे हमने मिलकर बनाया है, ताकि अपने लोगों के दर्द का जवाब दे सकें और किसी को भी जवाब की तलाश में अपनी जान न गंवानी पड़े।"
अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के दुख पर बात करते हुए, महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वह ऐसी गलियों से गुजरी हैं, जहां माताएं आज भी उन बेटों के लिए दीये जलाकर रखती हैं, जो कभी वापस नहीं लौटे। उन्होंने ऐसे पिताओं से भी मुलाकात की है, जिन्होंने कई जनाजे उठाए हैं, लेकिन उन्हें अपने सवालों के जवाब बहुत कम मिले हैं।
--आईएएनएस
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