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मेघालय मंत्रिमंडल ने यूरेनियम खनन के विरोध में मसौदा प्रस्ताव को मंजूरी दी

शिलांग, 13 अगस्त (आईएएनएस)। मेघालय मंत्रिमंडल ने राज्य में यूरेनियम खनन का विरोध करने वाले एक मसौदा प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार इसे 24 अगस्त से शुरू होने वाले आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा के समक्ष रखेगी।
 

शिलांग, 13 अगस्त (आईएएनएस)। मेघालय मंत्रिमंडल ने राज्य में यूरेनियम खनन का विरोध करने वाले एक मसौदा प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार इसे 24 अगस्त से शुरू होने वाले आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान विधानसभा के समक्ष रखेगी।

मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने गुरुवार को मंत्रिमंडल के इस निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि प्रस्तावित प्रस्ताव के माध्यम से विधानसभा के समक्ष यूरेनियम खनन पर राज्य सरकार का रुख औपचारिक रूप से रखा जाएगा।

यह निर्णय स्थानीय समुदायों के कुछ वर्गों द्वारा दशकों से यूरेनियम खनन के विरोध के मद्देनजर लिया गया है।

प्रस्तावित खनन स्थलों में डोमियासियत, वाहकाजी और मावथाबा शामिल हैं, जो मेघालय में यूरेनियम निष्कर्षण पर चल रही बहस के केंद्र में रहे हैं।

मंत्रिमंडल के इस निर्णय से उम्मीद है कि यह लंबे समय से लंबित मुद्दा औपचारिक विधायी प्रक्रिया में शामिल हो जाएगा, जिससे सरकार विधानसभा प्रस्ताव के माध्यम से यूरेनियम खनन पर अपना रुख स्पष्ट कर सकेगी।

मेघालय में भारत के यूरेनियम भंडार का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा होने का अनुमान है, जो इस मुद्दे को रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण बनाता है।

साथ ही, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक हितों और खनन के संभावित प्रभावों से संबंधित चिंताएं राज्य में विवाद के प्रमुख मुद्दे बनी हुई हैं।

मेघालय में यूरेनियम खनन का विरोध कई दशकों से जारी है, जिसमें स्थानीय संगठनों और सामुदायिक समूहों ने खनन गतिविधियों के संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक परिणामों पर बार-बार चिंता जताई है।

यह मुद्दा मेघालय में विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि राज्य की भूमि स्वामित्व और शासन व्यवस्था विशिष्ट है। भूमि का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक प्रणालियों द्वारा शासित है, जिसमें पारंपरिक संस्थाएं और स्थानीय समुदाय भूमि और प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रस्तावित प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब इस मुद्दे पर निरंतर बहस चल रही है कि मेघालय को अपने प्राकृतिक संसाधन क्षमता और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों तथा स्वदेशी समुदायों की चिंताओं के बीच संतुलन कैसे बनाना चाहिए।

इस मामले को विधानसभा के समक्ष लाकर सरकार यूरेनियम खनन पर राज्य के रुख को एक औपचारिक विधायी मंच प्रदान करना चाहती है।

मेघालय विधानसभा का शीतकालीन सत्र इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करने की उम्मीद है और यूरेनियम खनन पर राज्य के रुख को औपचारिक रूप से दर्ज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

--आईएएनएस

एमएस/