बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी, चार और बच्चों की मौत; मृतकों की संख्या बढ़कर 820 हुई
ढाका, 26 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों वाले चार और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही देश में खसरे से जुड़ी पुष्टि और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 820 हो गई है।
स्थानीय मीडिया के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने इन चारों मौतों को संदिग्ध खसरा मौत की श्रेणी में रखा है। ताजा आंकड़ों के बाद संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 725 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला में पुष्टि किए गए खसरे से मरने वालों की संख्या 95 पर स्थिर बनी हुई है।
पिछले 24 घंटों में देशभर में 990 नए संदिग्ध खसरे के मामले सामने आए हैं, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 1,23,753 हो गई है। वहीं, इसी अवधि में 170 नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए, जिसके बाद प्रयोगशाला में पुष्टि किए गए कुल संक्रमितों की संख्या 15,442 पहुंच गई है।
डीजीएचएस के अनुसार, 15 मार्च से अब तक खसरे के संदिग्ध 1,06,239 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 1,02,467 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
बढ़ते सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के बीच रिपोर्ट में बताया गया है कि बांग्लादेश में खसरे से हर दिन औसतन लगभग चार बच्चों की मौत हो रही है और 800 से अधिक मरीज रोज अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। हालांकि, सरकार का दावा है कि उसने आपातकालीन टीकाकरण अभियान का लक्ष्य पार कर लिया है, लेकिन अस्पतालों में अब भी बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें टीका नहीं लगा है। इससे टीकाकरण अभियान की कमियां उजागर हो रही हैं।
जुलाई के पहले तीन सप्ताह के दौरान भी स्थिति गंभीर बनी रही। इस अवधि में प्रतिदिन औसतन 1,005 संदिग्ध और पुष्ट मामले, 821 अस्पताल में भर्ती और करीब चार मौतें दर्ज की गईं।
मीजल्स और रूबेला उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय सत्यापन समिति के अध्यक्ष महमूदुर रहमान ने कहा कि टीकाकरण अभियान शुरू होने के दो महीने बाद भी हालात उम्मीद के मुताबिक नहीं सुधरे हैं और ऐसा लगता है कि अधिकारी इसकी गंभीरता को पूरी तरह नहीं समझ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, करीब 40 लाख बच्चों के टीकाकरण से वंचित रह जाने, अभियान की लक्षित आयु सीमा से अधिक उम्र के बच्चों में संक्रमण फैलने और संक्रमण नियंत्रण के कमजोर उपायों के कारण यह प्रकोप लगातार बना हुआ है।
पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ बे-नजीर अहमद ने कहा कि मीजल्स-रूबेला टीकाकरण और विटामिन-ए अभियान के आंकड़ों में करीब 40 लाख बच्चों का अंतर बेहद चौंकाने वाला है। उनके मुताबिक, इससे साफ है कि टीकाकरण का लक्ष्य ही पर्याप्त नहीं रखा गया था। उन्होंने कहा कि कमजोर योजना और जनजागरूकता की कमी के कारण बड़ी संख्या में परिवार संशोधित टीकाकरण कार्यक्रम की जानकारी से वंचित रह गए, जिसका असर अब सामने आ रहा है।
--आईएएनएस
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