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पुणे में बड़े पैमाने पर नौकरी रैकेट का भंडाफोड़, महाराष्ट्र सरकार ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए

मुंबई, 29 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र विधान परिषद में सोमवार को पुणे में चल रहे एक बड़े रैकेट के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।
 

मुंबई, 29 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र विधान परिषद में सोमवार को पुणे में चल रहे एक बड़े रैकेट के बारे में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

आरोप है कि यह सिंडिकेट पुणे नगर निगम (पीएमसी) में नौकरी दिलाने के बहाने, नकली हस्ताक्षर और मुहरों का इस्तेमाल करके फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर जारी करके युवाओं से लाखों रुपए की धोखाधड़ी कर रहा है। साथ ही, यह आईटी सेक्टर में नकली एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट, सैलरी स्लिप और पीएफ अकाउंट भी उपलब्ध करा रहा है।

उद्योग मंत्री उदय सामंत ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार इस पूरे मामले की स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू करेगी।

कांग्रेस के एमएलसी सत्यजीत तांबे और भाई जगताप ने 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के जरिए यह मुद्दा उठाया।

इसके जवाब में मंत्री सामंत ने कहा कि गृह विभाग बेरोजगार युवाओं को ठगने के गिरोहों की निष्पक्ष जांच करेगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

प्रस्ताव पेश करते हुए तांबे ने कहा, "सरकारी भर्तियों में घोटालों के बाद अब निजी क्षेत्र, विशेषकर आईटी उद्योग में धोखाधड़ी का एक जाल उभर आया है। पुणे राज्य का एक प्रमुख आईटी केंद्र होने के कारण, लाखों युवा रोजगार की तलाश में वहां आते हैं। कई प्रमुख कंपनियां नए लोगों को अवसर नहीं देतीं, इसका अनुचित लाभ उठाते हुए कुछ गिरोह फर्जी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट, फॉर्म-16, सैलरी स्लिप और टीसीएस जैसी बड़ी कंपनियों के बैंक स्टेटमेंट बना रहे हैं।"

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रत्येक उम्मीदवार से 5 लाख रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक की उगाही की जा रही थी।

तांबे ने बताया कि बेंगलुरु स्थित एक कंपनी द्वारा उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि का सत्यापन करने के बाद यह धोखाधड़ी सामने आई और उन्होंने इस तरह के घोटालों का शिकार होने वाले युवाओं के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन की मांग की।

इसी बीच, एमएलसी भाई जगताप ने सदन में अकोला के नीलेश राठौड़, भरतलाल पांडे और अभिनव मिश्रा के नाम संदिग्धों के रूप में लेते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

बहस का जवाब देते हुए मंत्री सामंत ने कहा कि पुणे नगर निगम के संबंध में प्रारंभिक शिकायत में किसी का नाम विशेष रूप से नहीं लिया गया था।

एक मामले में शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर धोखाधड़ी से प्राप्त 70 लाख रुपए में से 50 लाख रुपए वापस मिलने के बाद शिकायत वापस ले ली थी।

हालांकि, एक ही व्यक्ति का नाम तीन अलग-अलग शिकायतों में सामने आया था, इसलिए शिकायत वापस लेने के बावजूद सरकार स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि नीलेश राठौड़, भरतलाल पांडे और अभिनव मिश्रा की भूमिकाओं की गहन जांच की जाएगी।

दोषी पाए जाने पर उन कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिनमें 10 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है।

इसके अलावा, मंत्री ने कहा कि फर्जी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट का यह रैकेट केवल पुणे तक ही सीमित नहीं है, और राज्य के सभी पुलिस आयुक्तालयों में इसी तरह के मामलों की जांच के लिए निर्देश जारी किए जाएंगे।

उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि मौजूदा पुलिस हेल्पलाइन युवाओं की शिकायतों को संभालने में पूरी तरह सक्षम है और शिकायतकर्ताओं की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।

चर्चा के दौरान भाजपा विधायक प्रवीण पोटे ने पुलिस विभाग के कामकाज पर सवाल उठाए।

उन्होंने देरी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि 30 जनवरी को शिकायत दर्ज होने के बावजूद छह महीने तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे गंभीर मामलों में पुलिस को तुरंत स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

--आईएएनएस

डीकेपी/