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अगला हफ्ता शेयर बाजार के लिए बेहद अहम, तिमाही नतीजे, एफआईआई निवेश और वैश्विक संकेत तय करेंगे दिशा

मुंबई, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। अगला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा अहम होने वाला है। सितंबर तिमाही (क्यू2) के नतीजों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के निवेश रुख, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। निवेशक यह आकलन करेंगे कि हालिया मजबूत तेजी के बाद बाजार अपनी गति को बरकरार रख पाता है या नहीं।
 

मुंबई, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। अगला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा अहम होने वाला है। सितंबर तिमाही (क्यू2) के नतीजों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के निवेश रुख, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। निवेशक यह आकलन करेंगे कि हालिया मजबूत तेजी के बाद बाजार अपनी गति को बरकरार रख पाता है या नहीं।

बीते सप्ताह की बात करें तो, निफ्टी 50 में 2.77 प्रतिशत और सेंसेक्स में 3.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में नई खरीदारी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड के दबाव में कमी और घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की लगातार खरीदारी का समर्थन मिला।

शुक्रवार को भी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की, जिससे हालिया करेक्शन के बाद बाजार में रिकवरी की उम्मीदें और मजबूत हुईं।

सेंसेक्स 413.66 अंक यानी 0.56 प्रतिशत बढ़कर 74,729.27 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 148.80 अंकों या 0.65 प्रतिशत की तेजी आई और यह 23,146.15 के स्तर पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 2,256.94 अंकों और निफ्टी में 625.7 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।

अब बाजार प्रतिभागियों की नजर सितंबर तिमाही के नतीजों पर रहेगी। निवेशक यह देखेंगे कि हालिया तेजी केवल आईटी शेयरों तक सीमित रहती है या अन्य सेक्टरों में भी फैलती है। बैंकिंग, उपभोक्ता और औद्योगिक कंपनियों के नतीजों तथा प्रबंधन की टिप्पणियों पर विशेष नजर रहेगी, ताकि राजस्व वृद्धि, मार्जिन में सुधार और मांग की स्थिति का आकलन किया जा सके।

आने वाली तिमाहियों के लिए कंपनियों द्वारा जारी मार्गदर्शन (गाइडेंस) भी निवेशकों की धारणा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मजबूत नतीजे और सकारात्मक कारोबारी संकेत बाजार को समर्थन दे सकते हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन या सतर्क रुख आगे की तेजी को सीमित कर सकता है।

बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भी अहम रहेगा। हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कुछ कमी आई है, लेकिन यदि यह सिलसिला जारी रहा तो बाजार पर दबाव बन सकता है। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की लगातार खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।

वैश्विक बॉन्ड यील्ड और मौद्रिक नीति को लेकर उम्मीदें भी निवेशकों के फोकस में रहेंगी। यदि बॉन्ड यील्ड में फिर से तेजी आती है तो इक्विटी बाजार के मूल्यांकन पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि ऐसे में फिक्स्ड इनकम निवेश अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक हो जाते हैं। इसके विपरीत, यील्ड में नरमी जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ा सकती है और शेयर बाजार में निवेश को प्रोत्साहित कर सकती है।

कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी अगले सप्ताह महत्वपूर्ण रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती है, महंगाई पर दबाव डाल सकती है और कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। वहीं, किसी भी भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा सकती है।

--आईएएनएस

डीबीपी