खरीफ सीजन से पहले मणिपुर में किसानों की सुरक्षा और सहायता के उपाय तेज किए गए
इंफाल, 23 मई (आईएएनएस)। खरीफ ऋतु से पहले मणिपुर सरकार ने घाटी और पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों को सुरक्षा और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों से जुड़ी पिछली घटनाओं और हमलों को देखते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय शुरू कर दिए हैं कि मैतेई, कुकी और नागा समुदायों के किसान बिना किसी बाधा के खेती कर सकें। किसानों के हित और सुरक्षा के लिए रणनीतियां और समन्वित योजनाएं बनाने के लिए जिला स्तरीय बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
अधिकारी ने बताया कि बिष्णुपुर और चुराचंदपुर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में खरीफ धान की खेती के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु शुक्रवार को बिष्णुपुर स्थित मिनी सचिवालय (डीसी कार्यालय) में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी-जोन सेकेंड) निंगशेन वोरंगम ने बैठक की अध्यक्षता की, जिसके दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ जातीय हिंसा से प्रभावित आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) के पुनर्वास पर भी चर्चा हुई।
बिष्णुपुर और चुराचंदपुर के जिला पुलिस प्रमुखों ने अपने-अपने जिलों में खेती योग्य क्षेत्रों की पहचान की, जहां खरीफ मौसम के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता हो सकती है।
जातीय हिंसा से प्रभावित विस्थापितों के संबंध में बिष्णुपुर जिले की उपायुक्त ने बैठक को सूचित किया कि विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अधिकारियों से बातचीत के बाद आईजीपी वोरंगम ने कहा कि बिष्णुपुर और चुराचंदपुर जिलों में मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा संबंधी मुद्दों को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए इन जिलों के अधिकारियों के बीच घनिष्ठ समन्वय आवश्यक है।
खरीफ का मौसम जून से अक्टूबर तक रहता है। फसलें जून और जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और मानसून के अंत में सितंबर और अक्टूबर में काटी जाती हैं। इन फसलों को इष्टतम विकास के लिए भरपूर वर्षा और गर्म, आर्द्र जलवायु परिस्थितियों की आवश्यकता होती है।
--आईएएनएस
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