मणिपुर सरकार ने मणिपुरी टट्टू पालकों के लिए वार्षिक प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर 10,000 रुपए की
इंफाल, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। मणिपुर सरकार ने राज्य की लुप्तप्राय स्वदेशी अश्व प्रजाति के संरक्षण के प्रयासों के तहत मणिपुरी टट्टू पालकों के लिए वार्षिक प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर प्रति टट्टू 10,000 रुपए करने की घोषणा की है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विभाग के निदेशक एल. अरुणकुमार सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष राज्यपाल के माध्यम से 1,150 टट्टू पालकों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई थी।
अरुणकुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह द्वारा टट्टू पंजीकरण प्रणाली (पीआरएस) के शुभारंभ के बाद, विभाग ने प्रति टट्टू पालक वार्षिक प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 10,000 रुपए करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों ने पीआरएस पर काम शुरू कर दिया है, जिससे राज्य में टट्टुओं की कुल संख्या का निर्धारण करने में मदद मिलेगी।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, इस वर्ष टट्टुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। वार्षिक बजट में टट्टू मालिकों को प्रोत्साहन देने के लिए 30 लाख रुपए की राशि आवंटित की गई है।
मणिपुरी टट्टू सबसे पुरानी मान्यता प्राप्त स्वदेशी घोड़े की नस्लों में से एक है। इसके साथ ही यह अपनी बुद्धिमत्ता, चपलता और सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध है।
परंपरागत रूप से पोलो और घुड़दौड़ से जुड़ी यह नस्ल मणिपुर की सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मणिपुरी टट्टू को पोलो के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सबसे पुरानी नस्लों में से एक माना जाता है, जो सदियों से पूरे एशिया में खेला जाने वाला खेल है।
केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के समन्वय से चलाए जा रहे क्षेत्रीय विकास और ब्रांडिंग ढांचे के तहत, प्रत्येक उत्तर पूर्वी राज्य ने एक विशिष्ट विक्रय प्रस्ताव (यूएसपी) निर्धारित किया है।
मणिपुर का निर्धारित यूएसपी इसकी पोलो विरासत है। पोलो विरासत पहल के अंतर्गत आनुवंशिक-आधारित चयनात्मक प्रजनन घटक में दो प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं—चयनात्मक प्रजनन और अवसंरचना विकास।
अरुणकुमार सिंह ने बताया कि मंत्रालय और मणिपुर के मुख्यमंत्री द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किए गए लुप्तप्राय स्वदेशी मणिपुरी टट्टू के संरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
पशुधन कल्याण पहलों पर उन्होंने कहा कि विभाग मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार गायों, भैंसों और सूअरों जैसे पशुओं के लिए राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना लागू कर रहा है।
इस साल 1 अप्रैल से बुधवार तक कुल 2,456 जानवरों का बीमा कराया गया था।
पशु रोगों के नियंत्रण हेतु राज्यों को सहायता (एएससीएडी) योजना के तहत, लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी), अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ), हेमरेजिक सेप्टीसीमिया (एचएस), ब्लैक क्वार्टर (बीक्यू) और रेबीज जैसी बीमारियों के खिलाफ नियमित टीकाकरण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
मुर्गियों का टीकाकरण भी किया जाएगा। निदेशक ने आगे बताया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) के तहत कृत्रिम गर्भाधान (एआई) केंद्रों का निर्माण कार्य चल रहा है।
विभाग की घर-घर जाकर दी जाने वाली पशु चिकित्सा सेवाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि 11 जुलाई, 2024 को शुरू की गई 33 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां (एमवीयू) राज्य भर में कार्यरत हैं।
इस सेवा का लाभ टोल-फ्री नंबर 1962 के माध्यम से लिया जा सकता है। इस वर्ष 1 अप्रैल से बुधवार तक, मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा को 7,205 मामले प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने बताया कि इनमें से 693 मामलों का समाधान फोन पर ही हो गया, जबकि 6,512 मामलों को व्यक्तिगत रूप से जाकर निपटाया गया।
इस सेवा का उद्देश्य पशुपालकों को उनके घर पर ही पशु चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना और राज्य भर में पशु स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार करना है।
--आईएएनएस
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