पुणे में नॉर्थ-ईस्ट के छात्रों के लिए बनेगा हॉस्टल, मणिपुर के उपमुख्यमंत्री ने रखी आधारशिला
पुणे/इंफाल, 3 अगस्त (आईएएनएस)। मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की विरासत का एक अहम हिस्सा है। यह क्षेत्र समृद्ध परंपराओं, जीवंत संस्कृतियों, अपार प्रतिभा और विशाल संभावनाओं से भरपूर है, जो देश की वृद्धि और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
उपमुख्यमंत्री ने पुणे के कटराज में गुजर-निंबालकरवाड़ी में लगभग 10 करोड़ रुपए की लागत वाले 'स्वर्गीय जमनाबाई फिरोदिया नॉर्थ ईस्ट इंडिया भवन – रानी गाइदिनल्यू गर्ल्स हॉस्टल' की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, अनोखी जीवनशैली और ऐतिहासिक विरासत के साथ देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
नागा आदिवासी समुदाय के वरिष्ठ नेता डिखो ने कहा कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक इमारत बनाने से कहीं ज्यादा है। यह भारत के हर हिस्से से आने वाले छात्रों और युवाओं का समर्थन करने के लिए देश की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, "यह प्रोजेक्ट देश के हर हिस्से के युवाओं का समर्थन करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत' के विजन की ओर बढ़ रहा है, हर युवा को, चाहे वह कहीं से भी आया हो, अच्छी शिक्षा और अवसरों तक समान पहुंच मिलनी चाहिए।"
पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों के लिए इस प्रस्तावित भवन को 'घर से दूर एक और घर' बताते हुए डिखो ने कहा कि यह एक सुरक्षित और अच्छा माहौल देगा, जिससे छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी और साथ ही उनके व्यक्तिगत विकास, आत्मविश्वास और लंबी अवधि की सफलता को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि यह हॉस्टल खास तौर पर पुणे में पढ़ रहे मणिपुर के छात्रों के लिए एक स्थायी ठिकाने का काम करेगा। उन्हें यहां एक सहयोगी माहौल मिलेगा, जहां वे रहने की सही जगह खोजने की चुनौतियों के बिना अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकेंगे।
उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि मणिपुर सरकार युवाओं को सशक्त बनाने और पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने वाली पहलों का समर्थन करना जारी रखेगी, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता का एहसास कर सकें और देश के विकास में योगदान दे सकें।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित हॉस्टल, जिसके डेढ़ साल में पूरा होने की उम्मीद है, मणिपुर और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव, आपसी समझ और सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
अधिकारी ने आगे कहा कि अलग-अलग बैकग्राउंड, जातीय समुदायों और राज्यों के छात्र एक ही छत के नीचे रहेंगे, पढ़ेंगे और एक-दूसरे से बातचीत करेंगे। इससे एकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय अखंडता की भावना को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के युवाओं के बीच आपसी संबंध मजबूत होंगे।
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