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चिनाब नदी पर बने मंडोल पुल से सिराज को मिलेगी हर मौसम में बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा

डोडा, 30 सितंबर (आईएएनएस)। डोडा जिले में चेनाब नदी के पार 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' (अंतिम छोर तक संपर्क) को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सड़क और भवन विभाग ने नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट) की मदद से मंडोल पुल का निर्माण शुरू कर दिया है। यह पुल बनने के बाद, डोडा शहर से चेनाब नदी के दूसरी ओर और अस्सर में नेशनल हाईवे तक पहुंचने में लगने वाला समय 2.5 घंटे से घटकर 10 मिनट रह जाएगा।
 

डोडा, 30 सितंबर (आईएएनएस)। डोडा जिले में चेनाब नदी के पार 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' (अंतिम छोर तक संपर्क) को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सड़क और भवन विभाग ने नाबार्ड (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट) की मदद से मंडोल पुल का निर्माण शुरू कर दिया है। यह पुल बनने के बाद, डोडा शहर से चेनाब नदी के दूसरी ओर और अस्सर में नेशनल हाईवे तक पहुंचने में लगने वाला समय 2.5 घंटे से घटकर 10 मिनट रह जाएगा।

2025 में शुरू हुए 200 मीटर लंबे पुल का निर्माण मौजूदा वित्तीय वर्ष के आखिर तक पूरा हो जाएगा।

यह पुल विशाल चिनाब नदी के ऊपर 100 फीट की ऊंचाई पर होगा। इससे सिराज इलाके के लगभग 90,000 लोगों को सीधे और हर मौसम में काम आने वाली कनेक्टिविटी मिलेगी। इस इलाके में डोडा जिले के तीन एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक, कस्तीगढ़, बागवाह और अस्सर, और रामबन जिले का राजगढ़ ब्लॉक शामिल हैं।

डोडा के आरएंडबी (बागवाह डिवीजन) के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर दिनेश भूषण ने कहा, "मंडोल से मल्होरी तक बनने वाला यह मोटर-योग्य पुल 200 मीटर लंबा और 5.15 मीटर चौड़ा है। पुल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। यह कस्तीगढ़, बागवाह और अस्सर ब्लॉक को जोड़ेगा।"

उन्होंने आगे कहा कि यह पुल सिराज को एनएच 244 पर अस्सर से जोड़ेगा। पुल के निर्माण के लिए मंजूर की गई लागत 24.69 करोड़ रुपए है और आवंटित लागत 22.83 करोड़ रुपए है। बनने के बाद, इस मोटर-योग्य पुल से लगभग 90,000 लोगों को फायदा होगा और हाईवे पर यात्रा का समय भी कम हो जाएगा।

मुदस्सर नाम के एक स्थानीय निवासी ने आईएएनएस को बताया, "नदी के दूसरी ओर और अस्सर में नेशनल हाईवे तक पहुंचने के लिए हमें डोडा शहर से होकर 2.5 घंटे का सफर करना पड़ता है। जब पुल बन जाएगा, तो हमें वहां पहुंचने में सिर्फ 10 मिनट लगेंगे।"

मुदस्सर ने कहा, "मेरे पूर्वजों ने कभी ऐसा होने का सपना देखा था और इच्छा की थी। काश वे इस विकास को देखने के लिए जीवित होते, जिससे निश्चित रूप से पूरे सिराज के लोगों का जीवन बहुत आसान हो जाएगा।"

मलहोरी गांव के प्रेयावर्त सिंह ने आईएएनएस को बताया, "नदी का दूसरा किनारा बहुत पास है, लेकिन अगर हमें अपने रिश्तेदारों से मिलना हो या कोई इमरजेंसी हो तो वहां जाने के मुश्किल सफर को शुरू करने से पहले हम दो बार सोचते हैं। यह इस इलाके के लिए एक बहुत बड़ी बात है जो निश्चित रूप से हमारी जिंदगी को बेहतर बनाएगी।"

उन्होंने आगे कहा, "हम भारत सरकार के शुक्रगुजार हैं कि वह हमें बहुत जरूरी कनेक्टिविटी देने जा रही है। जो दूरी पहले 40 किलोमीटर से ज्यादा थी, वह पुल बनने के बाद आसानी से 10 मिनट में तय हो जाएगी।"

चिनाब नदी पर मोटर-गाड़ियों के चलने लायक पुलों का निर्माण सिराज इलाके की दूर-दराज और अलग-थलग आबादी के लिए एक अहम पड़ाव है। ये लोग चिनाब घाटी के डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों में फैली चिनाब के बाएं किनारे की पहाड़ी ढलानों पर रहते हैं।

इतिहास में, चिनाब के किनारे रहने वाले समुदायों को भौगोलिक रूप से अलग-थलग रहने की वजह से बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उन्हें खतरनाक पैदल पुलों, जिप-लाइन या पहाड़ी रास्तों से कई घंटे का लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ता था।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम