महाराष्ट्र ने ऋण माफी योजना में संशोधन कर इसे वित्त वर्ष 2026-27 तक बढ़ाया
मुंबई, 10 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कृषि समुदाय को बड़ी राहत देते हुए फसल ऋण माफी योजना में संशोधन की घोषणा की। इस योजना का उद्देश्य संकटग्रस्त किसानों को कर्ज के जाल से निकालना और उन्हें निजी साहूकारों से दूर रखना है।
घोषणा के समय को लेकर हो रही आलोचनाओं को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि यह निर्णय पूरी तरह से किसानों के संकट से प्रेरित है, न कि चुनावी लाभ के लिए। उन्होंने कहा कि हम 2029 तक इंतजार कर सकते थे, लेकिन हमने कार्रवाई करने का फैसला किया क्योंकि हमारे किसान गहरे संकट में हैं।
इस व्यापक पैकेज में पूर्ण कृषि ऋण माफी, एकमुश्त निपटान (ओटीएस) का विकल्प और नियमित रूप से बकाया चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन बोनस शामिल होंगे।
वे राज्य विधानसभा में पिछले सप्ताह के प्रस्ताव पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे।
संशोधित पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर ऋण माफी योजना, पिछली महात्मा फुले ऋण माफी योजना की तुलना में किसानों को अधिक सुरक्षा प्रदान करती है।
पुरानी योजना के तहत माफी की अधिकतम सीमा 2 लाख रुपए तय थी। यदि किसी किसान पर 2 लाख रुपए से एक रुपया भी अधिक बकाया होता था, तो वह इस योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित हो जाता था।
संशोधित योजना इस कठोर बाधा को हटा देती है।
जिन किसानों पर 2 लाख रुपए से अधिक का बकाया है, उन्हें भी अब राहत मिलेगी। बशर्ते वे अतिरिक्त राशि का भुगतान कर दें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वे बैंकिंग सुविधाओं से वंचित न रहें।
राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पात्र डिफॉल्ट के लिए कटऑफ तिथि बढ़ा दी है।
मूल रूप से यह छूट वित्तीय वर्ष 2025-26 तक के डिफॉल्ट को कवर करने के लिए निर्धारित थी, लेकिन अब इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 तक के बकाया फसल ऋणों को शामिल करने के लिए विस्तारित किया गया—राज्य के इतिहास में यह एक अभूतपूर्व निर्णय है।
विपक्ष के इस दावे का खंडन करते हुए कि इस योजना से केवल 12,000 से 13,000 किसानों को ही लाभ होगा और 36 लाख अन्य किसानों की अनदेखी की जाएगी, राज्य सरकार ने इन आंकड़ों को पूरी तरह से निराधार बताया।
--आईएएनएस
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