महाराष्ट्र में खरीफ बुआई 59 फीसद तक पहुंची
मुंबई, 13 जुलाई (आईएएनएस)। जुलाई के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र में हुई भारी बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आई है। 12 जुलाई तक राज्य में 84.61 लाख हेक्टेयर भूमि पर बुआई हो चुकी है, जो खरीफ फसलों के औसत रकबे का 59 प्रतिशत है। हालांकि, यह रफ्तार पिछले साल की तुलना में धीमी है। पिछले वर्ष इसी समय तक 1.18 करोड़ हेक्टेयर यानी 82 प्रतिशत क्षेत्र में बुआई पूरी हो चुकी थी।
कृषि विभाग का कहना है कि पिछले साल की तुलना में बुआई कम होने की एक बड़ी वजह अल नीनो का असर है।
जून में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण जुलाई की शुरुआत तक राज्य में केवल 28 प्रतिशत बुआई ही हो पाई थी। हालांकि, जुलाई के पहले हफ्ते में मानसून फिर से सक्रिय होने के बाद किसानों को राहत मिली और बुआई का काम तेज़ी से आगे बढ़ा। राज्य कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, विदर्भ और मराठवाड़ा में बुआई की स्थिति संतोषजनक रही है, जबकि कोंकण, पुणे और कोल्हापुर मंडल अभी भी पीछे हैं।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, विदर्भ का अमरावती मंडल खरीफ की बुआई में राज्य में सबसे आगे है। यहां औसत खेती वाले क्षेत्र के 81 प्रतिशत हिस्से में बुआई पूरी हो चुकी है। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर (65 प्रतिशत), लातूर (63 प्रतिशत), नासिक (56 प्रतिशत) और नागपुर (53 प्रतिशत) का स्थान है। वहीं, कोंकण क्षेत्र में मानसून की शुरुआत में बारिश अनियमित रहने से धान की रोपाई प्रभावित हुई। जून के पहले सप्ताह में बोई गई धान की पौध बारिश की कमी के कारण सूख गई। बाद में जुलाई में अच्छी बारिश होने पर किसानों को नर्सरी में दोबारा धान की बुआई करनी पड़ी।
कृषि विभाग के निदेशक रफीक नाइकवाड़ी ने कहा कि कोंकण में बुआई का प्रतिशत तब तक कम दिखाई देगा, जब तक नए धान के पौधे बड़े होकर रोपाई के लिए तैयार नहीं हो जाते। उन्होंने बताया कि तटीय इलाकों में जुलाई के दूसरे पखवाड़े में बुआई और रोपाई का काम तेज होने की उम्मीद है।
बारिश का वितरण सभी इलाकों में एक जैसा नहीं होने के कारण कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने किसानों से जल्दबाजी में बुआई न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विदर्भ और मराठवाड़ा में बुआई की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन पुणे, कोल्हापुर और कोंकण में बुआई का काम अभी भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ है।
मंत्री ने किसानों को सलाह दी कि वे बुआई शुरू करने से पहले अच्छी और लगातार बारिश का इंतजार करें। उन्होंने कहा कि अगर किसान शुरुआती या छिटपुट बारिश के बाद जल्दबाजी में बुआई कर देते हैं और फिर लंबे समय तक बारिश नहीं होती, तो फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि कृषि विभाग किसानों को ऐसी फसलें उगाने की सलाह दे रहा है, जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकें और सूखे का सामना कर सकें।
बारिश के दो दौर के बीच लंबे अंतराल से हुए नुकसान को देखते हुए कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने खेत तालाबों (फार्म पॉन्ड) के लिए सहायता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को बारिश का पानी जमा करने के लिए जरूरी सामग्री, खासकर खेत तालाबों में बिछाई जाने वाली प्लास्टिक लाइनिंग शीट, जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए। मंत्री ने कहा कि प्रशासन आने वाले मौसम को ध्यान में रखते हुए संभावित लंबे सूखे से निपटने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत संसाधनों का सही बंटवारा, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और लोगों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है।
कम बारिश और फसल के नुकसान से ग्रामीण इलाकों में बढ़ी परेशानी को देखते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार फसल नुकसान के आकलन (पंचनामा) का काम तेजी से कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने की योजना को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य खासकर वर्षा पर निर्भर खेती करने वाले उन किसानों को राहत पहुंचाना है, जो आर्थिक तंगी और कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं।
मंत्री भरणे ने कहा कि कृषि विभाग ने सभी जिला और स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज और खाद की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि लगातार बारिश होने के बाद जब देर से बुआई का मौका मिले, तब किसानों को बीज या खाद की कमी का सामना न करना पड़े।
--आईएएनएस
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