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विकसित महाराष्ट्र 2047 विजन को गति देने के लिए नई पीपीपी नीति लागू, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

मुंबई, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंगलवार को अपनी 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) नीति 2026' में प्रमुख संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक संशोधनों को मंजूरी दे दी। यह बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
 

मुंबई, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंगलवार को अपनी 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) नीति 2026' में प्रमुख संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक संशोधनों को मंजूरी दे दी। यह बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन को सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह अपडेटेड फ्रेमवर्क कैबिनेट की मंजूरी के बाद लाया गया है। इसका उद्देश्य राज्य भर में बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) परियोजनाओं में अधिक स्पष्टता लाना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और कार्यकुशलता बढ़ाना है। यह पीपीपी फ्रेमवर्क 'विकसित महाराष्ट्र 2047' विजन डॉक्यूमेंट के बिंदु 100 पर आधारित है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 200 करोड़ रुपए की 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (वीजीएफ) का प्रावधान किया गया है। 'महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन' (मित्र) द्वारा स्पष्टता और सरलीकरण की मांग के बाद नीति में कुल 11 प्रमुख संशोधन किए गए हैं।

ये प्रस्तावित बदलाव परियोजना विकास और प्रशासन (गवर्नेंस) के विभिन्न चरणों से जुड़े हैं।

इस नीति में 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (वीजीएफ) को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही जिन मामलों में यह नीति लागू नहीं होती, वहां डेवलपर्स और प्रोजेक्ट अथॉरिटी के स्वामित्व और जोखिमों के संबंध में अपडेटेड दिशानिर्देश तय किए गए हैं।

प्रशासनिक अड़चनों को कम करने के लिए परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी देने की प्रक्रिया से नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप समिति द्वारा की जाने वाली जांच के एक स्तर को हटा दिया गया है।

इसके अलावा, पीपीपी परियोजनाओं को मंजूरी देने के चरणों के दौरान अब मित्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को 'कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमिटी' की बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा। जिन परियोजनाओं में सरकारी सहायता, भूमि या 25 करोड़ रुपए तक का प्रीमियम शामिल है, उनके लिए 'एम्पावर्ड कमिटी' (सशक्त समिति) से औपचारिक मंजूरी लेना आवश्यक होगा।

25 करोड़ रुपए या उससे अधिक मूल्य की परियोजनाओं के लिए, 'एम्पावर्ड कमिटी' की सिफारिशों के आधार पर 'कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी (सीसीआई) से मंजूरी लेनी होगी।

इस नीति में प्रोजेक्ट डेवलपमेंट फंड (पीडीएफ), विभागीय परियोजना मूल्यांकन, 'स्पेशल पर्पस व्हीकल' (एसपीवी) के माध्यम से विकास, परियोजना की मंजूरी, और 'ट्रांजैक्शन एडवाइजर' (टीए) और लॉ फर्मों की नियुक्ति से जुड़े प्रावधानों को बेहतर बनाया गया है। इस फ्रेमवर्क में एक बड़ा बदलाव यह है कि इसमें क्लॉज 13 (एसेट मोनेटाइजेशन) के तहत एक नई नीतिगत अवधारणा जोड़ी गई है।

इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक संपत्तियों (जैसे भूमि और इमारतें) का आर्थिक मूल्य बढ़ाकर उनसे राजस्व प्राप्त करना है। ये ऐसी संपत्तियां हैं जो सामान्य पीपीपी मॉडल के तहत व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं हैं, लेकिन इनका उपयोग विकसित महाराष्ट्र 2047 विजन के लक्ष्यों के अनुरूप किया जा सकता है।

अपडेटेड पीपीपी दिशानिर्देशों के तहत परियोजनाएं अपनी शुरुआत से लेकर पूर्ण होने तक एक व्यवस्थित प्रक्रिया का पालन करेंगी। संबंधित विभाग द्वारा प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन, जनहित मूल्यांकन और 'वैल्यू फॉर मनी' (लागत के बदले मूल्य) का आकलन किया जाएगा, जिसमें 'प्रोजेक्ट डेवलपमेंट फंड' (पीडीएफ) से सहायता लेने का विकल्प भी होगा। तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता रिपोर्ट, आरएफपी (प्रस्ताव के लिए अनुरोध) के मसौदे और रियायती समझौतों को तैयार करने का काम ट्रांजेक्शन सलाहकारों और लॉ फर्मों के साथ मिलकर किया जाएगा।

बाजार में उतारने से पहले जरूरी शुरुआती मंजूरियां (ईसी/सीसीआई) ली जाएंगी, जिसके बाद एक पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया होगी, जिसका मूल्यांकन एक एकल वित्तीय मानदंड के आधार पर किया जाएगा।

अंतिम मंजूरी देने, चुने गए डेवलपर्स या एसपीवी के साथ रियायती समझौतों को निष्पादित करने और कार्यान्वयन की कड़ी निगरानी करने का काम 'एम्पावर्ड कमेटी (सशक्त समिति) करेगी। साथ ही, 5 करोड़ रुपए से अधिक के मामलों के लिए शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित किया जाएगा।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी