महाराष्ट्र: चीनी मिलों को वित्तीय सहायता देने की प्रक्रिया में बदलाव, एनसीडीसी ऋण मंजूरी होगी तेज
मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने वित्तीय संकट से जूझ रही सहकारी चीनी मिलों को जल्द सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से मिलने वाले मार्जिन मनी ऋण की मंजूरी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने बहुस्तरीय मंत्रिस्तरीय व्यवस्था को समाप्त कर एक विशेषज्ञ समिति को पूरी जिम्मेदारी सौंप दी है।
सोमवार को जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुसार, राज्य सरकार ने ऋण प्रस्तावों की समीक्षा करने वाली मंत्रिस्तरीय समिति को समाप्त कर दिया है। अब तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन का पूरा काम नई समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त करेंगे।
सरकार का मानना है कि इस कदम से प्रक्रियागत देरी कम होगी और पात्र सहकारी चीनी मिलों को तेजी से वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
5 सितंबर 2019 को बनाई गई नीति के तहत ऋण प्रस्तावों को कई स्तरों से गुजरना पड़ता था। सबसे पहले वित्तीय और तकनीकी जांच समितियां प्रस्ताव की समीक्षा करती थीं। इसके बाद प्रस्ताव एक उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय समिति के पास भेजा जाता था, जिसमें वित्त मंत्री, सहकारिता मंत्री, राज्य मंत्री (सहकारिता) और चीनी आयुक्त शामिल होते थे।
इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उपसमिति के पास भेजा जाता था।
नई व्यवस्था में मंत्रिस्तरीय स्तर की पूरी मध्यवर्ती प्रक्रिया समाप्त कर दी गई है। सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इससे प्रशासनिक जटिलताएं दूर होंगी।
अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के पास वर्तमान में वित्त विभाग का भी प्रभार है। ऐसे में मंत्रिस्तरीय समिति से सहकारिता मंत्री को सिफारिश भेजने की प्रक्रिया में व्यावहारिक दिक्कतें आ रही थीं। अब चीनी आयुक्त की अध्यक्षता वाली संयुक्त वित्तीय और तकनीकी समिति सीधे प्रस्तावों की व्यवहार्यता का आकलन करेगी और अपनी सिफारिशें देगी।
सरकारी प्रस्ताव में कहा गया है कि भविष्य में केवल उन्हीं सहकारी चीनी मिलों के प्रस्तावों की सिफारिश की जाएगी, जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य हों और कुशलतापूर्वक संचालन करने में सक्षम हों। सरकार के अनुसार, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि एनसीडीसी को भेजे जाने वाले प्रस्ताव आर्थिक रूप से टिकाऊ हों और मिलों के प्रभावी संचालन में मदद करें।
नई समिति की अध्यक्षता महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त करेंगे। इसके अलावा समिति में महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के प्रतिनिधि, महाराष्ट्र राज्य सहकारी चीनी कारखाना महासंघ लिमिटेड के प्रतिनिधि, वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि, चीनी आयुक्तालय के वित्त, प्रशासन और ऑडिट से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, उप-उत्पाद विभाग के संयुक्त निदेशक, कार्यकारी अभियंता शामिल होंगे।
यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब महाराष्ट्र का सहकारी चीनी क्षेत्र वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक पहले से कर्ज नहीं चुकाने वाली मिलों को नया ऋण देने में सख्ती बरत रहे हैं।
कई वित्तीय संस्थानों ने नई कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने से पहले राज्य सरकार की गारंटी को अनिवार्य बना दिया है। इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार एनसीडीसी के माध्यम से कमजोर सहकारी चीनी मिलों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।
मई 2023 में शुरू की गई विशेष योजना के तहत मार्जिन मनी ऋण राज्य सरकार की गारंटी पर दिया जाता है।
सरकार का मानना है कि विशेषज्ञ समिति के जरिए मूल्यांकन होने से पात्र मिलों को जल्दी धनराशि मिलेगी, जिससे गन्ना किसानों के उचित एवं लाभकारी मूल्य का भुगतान समय पर हो सकेगा और राज्य के चीनी उत्पादक क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी।
--आईएएनएस
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