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महादेव ऐप का किंगपिन सौरभ चंद्राकर रायपुर कोर्ट में होगा पेश, ओमान से हुआ प्रत्यर्पण

रायपुर/नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। महादेव ऐप अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को रायपुर कोर्ट में पेश किए जाने की संभावना है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) उसे मंगलवार को रायपुर ला सकती है। दो दिन पहले ही उसे ओमान से भारत लाया गया है।
 

रायपुर/नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। महादेव ऐप अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को रायपुर कोर्ट में पेश किए जाने की संभावना है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) उसे मंगलवार को रायपुर ला सकती है। दो दिन पहले ही उसे ओमान से भारत लाया गया है।

सीबीआई की एक विशेष टीम उसे भारत वापस लेकर आई है। सौरभ चंद्राकर दो सीबीआई मामलों में वांछित है, जिनमें पहले ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और एक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में भी, जहां अभियोजन शिकायत दर्ज की गई है। ट्रांजिट रिमांड की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा और रायपुर में सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सौरभ चंद्राकर के लिए सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी है। एजेंसी उसे रायपुर ले जाएगी और 4 नवंबर को या उससे पहले वहां की विशेष अदालत में पेश करेगी, जहां महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में पूछताछ के लिए उसकी आगे की रिमांड मांगे जाने की उम्मीद है।

सीबीआई छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर महादेव ऑनलाइन बुक मामलों की जांच कर रही है, जिसने इससे जुड़ी 13 एफआईआर एजेंसी को ट्रांसफर की थीं। इनमें से दो मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय भी मनी-लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच कर रहा है और चंद्राकर के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज कर चुका है।

जांच में पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था, जो भारत के बाहर से संचालित किया जा रहा था। यह देशभर में फैले फ्रेंचाइज्ड पैनल और ब्रांच के नेटवर्क के माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, कार्ड गेम और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी की पेशकश करता था।

इससे होने वाली कमाई को बड़ी संख्या में फर्जी बैंक खातों के जरिए भेजा जाता था, कई लेनदेन के जरिए लेयरिंग की जाती थी और हवाला चैनलों के माध्यम से विदेश ले जाया जाता था। आय का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षा राशि के रूप में दिया जाता था ताकि सिंडिकेट बिना किसी बाधा के काम कर सके।

सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। चंद्राकर इन चार्जशीट में नामित प्रमुख आरोपियों में से एक है। प्रवर्तन निदेशालय ने सिंडिकेट से जुड़ी भारत और विदेश में कई संपत्तियों को भी जब्त किया है।

रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर चंद्राकर को रॉयल ओमान पुलिस ने खोजा और हिरासत में लिया। सीबीआई और ईडी ने उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों के साथ ओमान को औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजे थे।

प्रत्यर्पण अनुरोध को भारतीय एजेंसियों, इंटरपोल नेशनल सेंट्रल ब्यूरो और ओमान के सक्षम अधिकारियों के साथ निकट समन्वय में आगे बढ़ाया गया था। प्रत्यर्पण मंजूर होने के बाद सीबीआई की टीम मस्कट गई और उसे वापस भारत ले आई। सीबीआई ने सहयोग के लिए ओमान सल्तनत की सरकार और रॉयल ओमान पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम