मदुरै नगर निगम कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए एआई और जीपीएस तकनीक अपनाएगा
मदुरै, 21 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मदुरै नगर निगम ने शहर में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एआई, जीपीएस आधारित निगरानी और विकेंद्रीकृत कचरा प्रसंस्करण प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस पहल का उद्देश्य शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना, अवैध कचरा फेंकने पर रोक लगाना और स्वच्छता सेवाओं की दक्षता बढ़ाना है।
नगर निगम ने इसके लिए एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसमें ऐसे स्थानों की पहचान करना शामिल है जहां बार-बार कचरा फेंका जाता है। साथ ही सफाई कार्यों की निगरानी मजबूत करने और जैविक कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जाएगा।
योजना के तहत एआई तकनीक की मदद से शहर के उन स्थानों की पहचान की जाएगी जहां नियमों का उल्लंघन कर लगातार कचरा डाला जाता है। सीसीटीवी कैमरों और अन्य निगरानी प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर एआई ऐसे संवेदनशील स्थानों का स्वतः पता लगाएगा, जिससे नगर निगम के अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे और कचरे के ढेर लगने से पहले ही समस्या का समाधान कर पाएंगे।
इसके अलावा, सफाई कर्मचारियों और कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी के लिए जीपीएस आधारित प्रणाली लागू की जाएगी। इससे वाहनों की वास्तविक समय में लोकेशन, तय मार्गों का पालन, कर्मचारियों की उपस्थिति और समय पर कचरा संग्रहण की निगरानी संभव होगी। यह व्यवस्था सफाई कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाने के साथ-साथ नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण में भी मदद करेगी।
नगर निगम ने शहर के 10 ऐसे स्थानों की पहचान की है जहां बार-बार कचरा फेंका जाता है। इनमें वंडियूर पार्क बैडमिंटन प्वाइंट, होली फैमिली स्कूल क्षेत्र और शहर के फल बाजार के सामने का इलाका प्रमुख हैं। इन स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि अवैध कचरा फेंकने की घटनाओं में कमी लाई जा सके।
जैविक कचरे के बेहतर निस्तारण के लिए नगर निगम पांच नए माइक्रो कम्पोस्टिंग सेंटर (एमसीसी) भी स्थापित करेगा। वर्तमान में मदुरै में 30 माइक्रो कम्पोस्टिंग सेंटर संचालित हैं। नए केंद्र शुरू होने से शहर में विकेंद्रीकृत कचरा प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जैविक कचरे का निस्तारण होने से डंपिंग यार्ड तक कचरा ले जाने की आवश्यकता कम होगी, परिवहन लागत घटेगी और लैंडफिल पर दबाव भी कम पड़ेगा। इससे शहर को स्वच्छ और टिकाऊ शहरी वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि स्थायी सुधार के लिए घर-घर से कचरा संग्रहण व्यवस्था को भी और अधिक प्रभावी बनाना जरूरी होगा।
--आईएएनएस
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